प्रशांत भूषण का राघव चड्ढा पर हमला
AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर प्रशांत भूषण का तीखा हमला: बोले- ‘यह पूरी तरह अवसरवादिता है’
(नई दिल्ली डेस्क)
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद देश का सियासी पारा चढ़ गया है। इस बड़े घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और ‘आप’ के पूर्व सदस्य प्रशांत भूषण ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले गुट को ‘अवसरवादी’ करार देते हुए पार्टी छोड़ने के पुराने और नए दौर के बीच का अंतर समझाया है।
प्रशांत भूषण का ‘सिद्धांत बनाम अवसरवादिता’ तर्क
प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए अरविंद केजरीवाल और बागी सांसदों पर निशाना साधा:
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पहला ग्रुप (पुराना दौर): भूषण ने कहा कि जब उन्होंने और अन्य लोगों ने पहली बार पार्टी छोड़ी थी, तब कारण सिद्धांतों से समझौता था। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने उन मूल्यों को छोड़ दिया था जिन पर पार्टी खड़ी हुई थी।
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दूसरा ग्रुप (मौजूदा दौर): राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले गुट पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा कि इन नेताओं ने सत्ता का पूरा सुख भोगा और राज्यसभा की सीटें हासिल कीं। अब इनका भाजपा में जाना किसी विचारधारा के कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह अवसरवादिता के चलते है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं में कोई सिद्धांत शेष नहीं है।
बीजेपी दफ्तर में राघव चड्ढा का जोरदार स्वागत
शुक्रवार (24 अप्रैल) को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक भाजपा मुख्यालय पहुंचे।
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नितिन नवीन ने खिलाई मिठाई: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों नेताओं का मिठाई खिलाकर स्वागत किया।
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विलय का दावा: राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि राज्यसभा में ‘आप’ के दो-तिहाई से अधिक (7/10) सांसदों ने भाजपा में विलय का निर्णय लिया है, जिसके दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंप दिए गए हैं।
‘ऑपरेशन लोटस’ बनाम ‘संवैधानिक अधिकार’
इस दलबदल को लेकर दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज है:
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AAP का आरोप: संजय सिंह और ‘आप’ नेतृत्व ने इसे बीजेपी का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि ईडी और सीबीआई का डर दिखाकर पंजाब की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है।
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राघव चड्ढा का पक्ष: चड्ढा का कहना है कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत विलय कर रहे हैं और ‘आप’ अब अपने मूल उद्देश्यों से भटक चुकी है।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
आम आदमी पार्टी अब इन सांसदों को अयोग्य (Disqualify) घोषित करने की कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, संख्या बल (7 सांसद) बागी गुट के पक्ष में होने के कारण दल-बदल विरोधी कानून के तहत उन पर कार्रवाई करना एक बड़ी चुनौती होगी।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

