जनगणना 2027: पहली डिजिटल गणना

जनगणना 2027: भारत की पहली डिजिटल गणना, डिजिटल भारत की नई पहचान

 

नई दिल्ली: भारत अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर अग्रसर है। जनगणना 2027 देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जो न केवल आंकड़ों के संग्रह के तरीके को बदलेगी, बल्कि ‘डिजिटल इंडिया’ के संकल्प को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगी। मोबाइल ऐप और आधुनिक तकनीक के माध्यम से होने वाला यह अभियान डेटा संग्रह की गति और सटीकता को कई गुना बढ़ा देगा।


प्रमुख निर्णय: जातिगत गणना को मिली मंजूरी

एक बड़े राजनैतिक और सामाजिक निर्णय के तहत, राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 की बैठक में जातिगत गणना को जनगणना 2027 का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। यह कदम लक्षित नीति निर्धारण और समावेशी विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बजट और प्रशासनिक तैयारियां

सरकार ने इस विशाल डिजिटल अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक संसाधनों का आवंटन किया है:

  • भारी बजटीय प्रावधान: जनगणना 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।

  • मजबूत ढांचा: जमीनी स्तर पर कर्मियों का प्रशिक्षण और ‘प्री-टेस्ट’ जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।

  • तकनीकी सुरक्षा: डेटा की सुरक्षा के लिए केंद्रों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ (CII) घोषित किया गया है, ताकि नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे।

डिजिटल जनगणना के लाभ

  1. त्वरित आंकड़े: मैन्युअल डेटा एंट्री की तुलना में डिजिटल संग्रह से आंकड़े बहुत जल्दी प्रोसेस और उपलब्ध होंगे।

  2. कुशलता: मोबाइल ऐप के उपयोग से कागजी कार्रवाई कम होगी और त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।

  3. सटीक नीति निर्धारण: विश्वसनीय और विस्तृत डेटा के आधार पर सरकार बेहतर कल्याणकारी योजनाएं बना सकेगी।

  4. समावेशिता: जातिगत आंकड़ों के शामिल होने से समाज के हर वर्ग तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आसान होगा।

निष्कर्ष

जनगणना 2027 केवल व्यक्तियों की गिनती नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की जरूरतों को समझने का एक वैज्ञानिक आधार है। एक विशाल कार्यबल और सुरक्षित तकनीकी बुनियादी ढांचे के साथ, यह अभियान भारत के भविष्य के नीति निर्धारण के लिए एक विश्वसनीय मार्गदर्शक बनेगा

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर(Allrights Magazine)

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