ट्रंप पर तीसरा हमला: पूरी टाइमलाइन
ट्रंप पर फिर हमला: एक या दो नहीं, तीन बार हुई मारने की कोशिश—देखें पूरी टाइमलाइन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में ‘व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर’ के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। यह ट्रंप पर हुआ तीसरा बड़ा जानलेवा हमला है। गनीमत रही कि राष्ट्रपति, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित सभी वीवीआईपी सुरक्षित हैं।
आइए जानते हैं, कब-कब और कैसे डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाया गया:

1. मार्च 2016: लास वेगास (चुनाव प्रचार के दौरान)
डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की पहली बड़ी कोशिश उनके पहले राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान हुई थी।
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क्या हुआ: लास वेगास की एक रैली में सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए एक ब्रिटिश नागरिक माइकल सैंडफोर्ड ने मंच के पास पहुंचकर एक पुलिस अधिकारी की बंदूक छीनने की कोशिश की।
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मंशा: पकड़े जाने के बाद उसने स्वीकार किया कि उसका उद्देश्य ट्रंप पर गोली चलाना था। उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में डिपोर्ट कर दिया गया।
2. 13 जुलाई 2024: पेन्सिलवेनिया (बटलर रैली)
यह ट्रंप के जीवन का सबसे खतरनाक हमला था, जिसकी तस्वीरें दुनिया भर में वायरल हुईं।
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क्या हुआ: पेन्सिलवेनिया के बटलर में एक चुनावी रैली के दौरान 20 वर्षीय शूटर थॉमस मैथ्यू क्रुक्स ने पास की एक छत से स्नाइपर राइफल से फायरिंग की।
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परिणाम: एक गोली ट्रंप के दाहिने कान के ऊपरी हिस्से को छूते हुए निकल गई। इस हमले में रैली में मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को मौके पर ही ढेर कर दिया था।
3. 25 अप्रैल 2026: वॉशिंगटन डीसी (हिल्टन होटल)
ताजा हमला शनिवार रात (अमेरिकी समय के अनुसार) एक हाई-प्रोफाइल डिनर के दौरान हुआ।
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क्या हुआ: जब ट्रंप हिल्टन होटल में पत्रकारों और गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करने की तैयारी में थे, तभी होटल के बाहर और लॉबी के पास गोलियों की आवाज सुनाई दी।
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सुरक्षा: सुरक्षा घेरे में मौजूद ‘सीक्रेट सर्विस’ ने तुरंत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। पुलिस ने संदिग्ध हमलावर को हिरासत में लिया है।
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हाई-प्रोफाइल गेस्ट: हमले के वक्त वहां मेलानिया ट्रंप, जेडी वेंस, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और विदेश सचिव मार्को रूबियो भी मौजूद थे।
सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
एक के बाद एक हुए इन हमलों ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी ‘सीक्रेट सर्विस’ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से 2026 के इस ताजा हमले ने साबित कर दिया है कि भारी सुरक्षा के बावजूद राष्ट्रपति की जान पर खतरा टला नहीं है।
निष्कर्ष: डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते हमले अमेरिका में गहरी राजनीतिक ध्रुवीकरण और हिंसा की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, हर बार ट्रंप ने इन हमलों के बाद और अधिक आक्रामक तरीके से वापसी की है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

