दिल्ली: लक्ष्मी नगर में ट्रांसफॉर्मर ब्लास्ट

लक्ष्मीनगर में ट्रांसफॉर्मर ब्लास्ट

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर (रमेश पार्क इलाका) में देर रात एक बिजली के ट्रांसफॉर्मर में अचानक जोरदार धमाके के साथ भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने पास की रिहायशी इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करीब 14 फ्लैट्स बुरी तरह प्रभावित हुए। हादसे के वक्त ज्यादातर लोग घरों में सो रहे थे, जिससे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

सूचना मिलते ही दमकल की 7 से 8 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। संकरी गलियों और रास्तों के बावजूद दमकल कर्मियों ने सूझबूझ से काम लिया और इमारतों में फंसे सभी 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गनीमत यह रही कि इस भीषण हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन शॉर्ट सर्किट और लापरवाही ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

‘तारों का शहर’ दिल्ली: खिड़कियों से छू रहे मौत के जाल

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। आज दिल्ली के लक्ष्मी नगर, शाहदरा, पहाड़गंज और पुरानी दिल्ली जैसे कई इलाकों की गलियां ‘तारों का मकड़जाल’ बन चुकी हैं। आलम यह है कि हाई-वोल्टेज बिजली के तार, इंटरनेट और केबल कटी पतंग की तरह लोगों के घरों की बालकनी, खिड़कियों और लोहे की ग्रिल को छूते हुए गुजर रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अपने ही घरों में डर के साये में जीने को मजबूर हैं। खिड़की खोलने पर सामने सीधे नंगे तार दिखाई देते हैं। कई जगहों पर तो भारी-भरकम ट्रांसफॉर्मर और तारों के बोझ से बिजली के खंभे तक एक तरफ झुक गए हैं।

मानसून सिर पर, करंट का खतरा दोगुना: क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

अब जब मानसून का सीजन दस्तक दे रहा है, जनता की चिंताएं सातवें आसमान पर हैं। बारिश के दिनों में इन लटकते तारों से पानी रिसने और पूरी दीवार या ग्रिल में करंट उतरने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

जनता का तीखा सवाल: “क्या सरकार और बिजली कंपनियां किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं? हर बार घटना के बाद जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।”

मानसून की पहली भारी बारिश से पहले अगर इन तारों को अंडरग्राउंड करने या इन्हें व्यवस्थित करने का काम नहीं किया गया, तो लक्ष्मी नगर जैसा हादसा किसी दिन बड़ी जनहानि का कारण बन सकता है। शासन और प्रशासन को राजनीति से ऊपर उठकर दिल्ली की जनता को इस ‘सड़क वाले टाइम बम’ से निजात दिलानी ही होगी।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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