परसाखेड़ा का गंदा पानी शंखा नदी में

बरेली: परसाखेड़ा की 244 फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी शंखा नदी में होने लगा समाहित; रामगंगा और गंगा तक प्रदूषण का खतरा, CETP बनाने की तैयारी शुरू

विशेष पर्यावरण व प्रशासनिक रिपोर्ट

(बरेली): उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में शुमार परसाखेड़ा से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र (Parsakhera Industrial Area) की लगभग २४४ फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला व प्रदूषित पानी बिना किसी ट्रीटमेंट (शोधन) के सीधे स्थानीय ‘शंखा नदी’ में मिल रहा है [cite: परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला दूषित पानी शंखा नदी को दूषित कर रहा है। औद्योगिक क्षेत्र की करीब 244 इकाइयों का गंदा पानी नालियों से बहकर इस नदी में पहुंच रहा है।]।

इस गंभीर जल प्रदूषण (Water Pollution) के कारण न सिर्फ शंखा नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है, बल्कि आगे चलकर यह दूषित जल रामगंगा और अंततः पवित्र गंगा नदी के जल को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है [cite: आगे चलकर शंखा नदी का जल रामगंगा नदी में और फिर गंगा नदी में पहुंचता है।ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला पानी व्यापक जल स्रोतों को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर रहा है।]। स्थानीय उद्यमियों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरे जिले को इसकी भारी पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ेगी।

कैसे फैक्ट्रियों का जहर बन रहा है नदियों की तबाही का कारण?

परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम की बनावट ही इस बड़ी समस्या की मुख्य वजह बन चुकी है:

  • कच्चे नाले का डार्क रूट: औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों पहले पक्के नालों का निर्माण कराया गया था। इन सभी नालों का पानी एक बड़े कच्चे नाले में जाकर एकत्र होता है [cite: परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों पूर्व पक्के नालों का निर्माण कराया गया था। क्षेत्र के विभिन्न नालों का पानी बड़े कच्चे नाले में एकत्र होता है।]। यह कच्चा नाला दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) क्षेत्र से गुजरते हुए सीधे शंखा नदी में जाकर गिरता है।

  • एसटीपी (STP) का अभाव: हालांकि इस औद्योगिक क्षेत्र में अत्यधिक खतरनाक रासायनिक अपशिष्ट (Chemical Waste) उत्पन्न करने वाली भारी फैक्ट्रियां कम हैं, फिर भी सामान्य औद्योगिक कचरों और गंदे पानी को साफ करने के लिए यहां अब तक कोई सामूहिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित नहीं किया जा सका है [cite: हालांकि यहां अत्यधिक रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योग कम हैं, फिर भी विभिन्न इकाइयों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के नालों के माध्यम से नदी तक पहुंच रहा है। क्षेत्र में अभी तक किसी सामूहिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना नहीं हो सकी है, जिसके कारण समस्या लगातार बढ़ रही है।]।

उद्योग बंधु की बैठकों में गूंजा मामला; शोधन के बाद ही मिले पानी

इस गंभीर पर्यावरणीय संकट को लेकर लघु उद्योग भारती के जिला अध्यक्ष एसके सिंह ने जिला प्रशासन से कड़ी मांग की है:

“औद्योगिक क्षेत्र का पूरा ड्रेनेज सीधे तौर पर शंखा नदी से जुड़ गया है। फैक्ट्रियों का अनुपचारित (Untreated) पानी नदी के पूरे इकोसिस्टम को नष्ट कर रहा है। हमने ‘उद्योग बंधु’ की मंडल स्तरीय बैठकों में भी कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। प्रशासन को चाहिए कि कंपनियों के अपशिष्ट जल का अनिवार्य शोधन सुनिश्चित कराए बिना उसे किसी भी हाल में नदी में न गिरने दे।” [cite: लघु उद्योग भारती के जिला अध्यक्ष एसके सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र का ड्रेनेज सिस्टम सीधे नालों के माध्यम से शंखा नदी से जुड़ गया है। इससे दूषित जल नदी में पहुंच रहा है, जो पर्यावरण की दृष्टि से गंभीर विषय है।, उन्होंने प्रशासन से मांग की कि औद्योगिक क्षेत्र के अपशिष्ट जल का शोधन सुनिश्चित करने के बाद ही उसे नदी में छोड़ा जाए, जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सके और नदियों में स्वच्छ जल प्रवाहित हो सकें। यह मामला मंडल स्तर पर उद्योग बंधु की बैठकों में भी कई बार उठाया गया है, जिसमें अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।]

सीईटीपी (CETP) के निर्माण के लिए १ साल में तैयार होगी डीपीआर (DPR)

इस समस्या के स्थायी और ठोस समाधान के लिए यूपी स्टेट औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) अब एक्शन मोड में आता दिख रहा है:

  • जल निगम करेगा सर्वे: यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक मंसूर कटियार ने बताया कि परसाखेड़ा में एक भव्य कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है [cite: परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सीईटीपी यानी कामन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के बाद ही समस्या का समाधान हो सकेगा। इसके लिए यूपी स्टेट औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसका निर्माण होने में अभी काफी देर है।]।

  • तैयार होगी रूपरेखा: उत्तर प्रदेश जल निगम को इस प्लांट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है [cite: यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक मंसूर कटियार ने बताया कि जल निगम के माध्यम से सीईटीपी का डीपीआर तैयार कराने के लिए कहा गया है।]। जल निगम की टीम जल्द ही पूरे क्षेत्र का स्थलीय और तकनीकी सर्वे शुरू करेगी, जिसके बाद एक वर्ष के भीतर डीपीआर फाइनल कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

५५ किमी लंबी शंखा नदी के पुनर्जीवन और सीमांकन की तैयारी

मीरगंज और शीशगढ़ क्षेत्र के हजारों किसानों की लाइफलाइन मानी जाने वाली लगभग ५५ किलोमीटर लंबी शंखा नदी (जो धौराटांडा से निकलती है) को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है [cite: जिले में शंखा नदी या नाला मीरगंज और शीशगढ़ क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलधारा है। लगभग 55 किलोमीटर लंबी यह धारा धौराटांडा से निकलकर रामगंगा नदी में मिलती है और स्थानीय किसानों की सिंचाई का प्रमुख साधन है।]। वर्षों की प्रशासनिक उपेक्षा, औद्योगिक प्रदूषण और अवैध अतिक्रमण के कारण यह ऐतिहासिक जलधारा सिकुड़कर कई जगहों पर नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है [cite: स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों की उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण शंखा नदी का अस्तित्व संकट में पहुंच गया है। कई स्थानों पर नदी की भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आई हैं।]।

राजस्व विभाग की संयुक्त टीम करेगी पैमाइश:

जिलाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद मीरगंज की उपजिलाधिकारी (SDM) निधि शुक्ला और सदर क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई [cite: जिलाधिकारी के निर्देश पर मीरगंज की उपजिलाधिकारी निधि शुक्ला और सदर क्षेत्र के अधिकारियों की बैठक में नदी की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा चल रही है।]। बैठक में निर्णय लिया गया है कि शंखा नदी के पुराने राजस्व नक्शों और ऐतिहासिक अभिलेखों का बारीकी से अध्ययन कर नदी की सीमाओं का वास्तविक सीमांकन (Demarcation) कराया जाएगा [cite: निर्णय लिया गया है कि शंखा नदी का सीमांकन कराने के लिए संयुक्त टीम गठित की जाएगी।, इसके बाद पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।]। इसके लिए राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया जा रहा है जो मौके पर जाकर अवैध कब्जों को चिह्नित करेगी [cite: यह टीम राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर नदी की वर्तमान स्थिति का सर्वेक्षण करेगी। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर नदी के वास्तविक बहाव क्षेत्र, सीमाओं और स्वरूप का निर्धारण किया जाएगा।]।

“शंखा नदी को उसका पुराना प्राकृतिक और स्वच्छ स्वरूप वापस लौटाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र का दूषित पानी शंखा नदी को नुकसान पहुंचा रहा है, तो इसके बहाव को रोकने और ट्रीटमेंट के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।” [cite: मीरगंज की उपजिलाधिकारी निधि शुक्ला ने बताया कि शंखा नदी के पुनर्जीवन के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन नियमित रूप से निगरानी कर रहा है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित पानी नदी में पहुंच रहा है तो उसके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उद्देश्य यह है कि नदी को प्रदूषण से मुक्त कर उसका प्राकृतिक स्वरूप बहाल किया जा सके।]

निधि शुक्ला, उपजिलाधिकारी (मीरगंज, बरेली)


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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