भारतद्रोहियों देश धर्मशाला नहीं: सीएम योगी

भारतद्रोहियों के लिए देश की धरती ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकती; लव और लैंड जिहाद के खिलाफ एकजुट हो समाज: सीएम योगी

विशेष सांस्कृतिक व राजनीतिक रिपोर्ट

(लखनऊ): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने देश की सुरक्षा, संस्कृति और सनातन विरासत को लेकर एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अख्तियार किया है [cite: मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दो-टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा नहीं है और जो संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती।]। लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में आयोजित ९ दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि जिनके मन में देश के प्रति आस्था और निष्ठा नहीं है, उनके लिए भारत की धरती ‘धर्मशाला’ नहीं हो सकती [cite: मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दो-टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा नहीं है और जो संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती।, 9 दिवसीय इस रामकथा का आयोजन सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में किया गया।]।

तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा वाचित इस रामकथा के मंच से सीएम योगी ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ जैसी नकारात्मक ताकतों के खिलाफ पूरे समाज को एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया [cite: कथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया।, लव व लैंड जिहाद के प्रति आगाह करते हुए सीएम ने कहा कि इसके विरुद्ध समाज को एकजुटता के साथ खड़ा होना होगा।]।

‘लव और लैंड जिहाद’ रामायण काल के राक्षसी कृत्यों जैसे: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने समकालीन सामाजिक समस्याओं की तुलना रामायण काल की नकारात्मक ताकतों से करते हुए समाज को सचेत किया:

  • नारी गरिमा और लव जिहाद: सीएम ने कहा कि रावण द्वारा माता सीता का अपहरण और प्रभु राम द्वारा उत्तर-दक्षिण को जोड़कर किया गया संघर्ष आज ‘लव जिहाद’ को रोकने और नारी गरिमा की रक्षा के लिए एक आदर्श उदाहरण है [cite: सीएम ने कहा कि रावण ने मां जानकी का अपहरण किया। भगवान राम ने यत्न कर उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ा। नारी गरिमा की रक्षा लव जिहाद को रोकने के लिए आदर्श उदाहरण हो सकता है।]। उन्होंने केरल हाई कोर्ट द्वारा २००९ और २०११ में डेमोग्राफी बदलने की साजिशों पर जताई गई चिंता का हवाला देते हुए कहा कि यूपी में २०२० में सख्त कानून बनाने के बावजूद इस पर व्यापक सामाजिक जागरूकता की जरूरत है [cite: केरल उच्च न्यायालय ने 2009 व 2011 में रिलीजियस डेमोग्राफी को चेंज करने की साजिश पर चिंता व्यक्त की, लेकिन उस समय भी ध्यान नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश में हमने 2020 में सख्त कानून बताया, फिर भी इस पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है।]।

  • लैंड जिहाद पर प्रहार: सीएम ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रामायण काल के राक्षस मारीच, सुबाहु और खर-दूषण भी ‘लैंड जिहाद’ (जमीन कब्जाने के खेल) से जुड़े थे, जो जबरन वनों और जमीनों पर कब्जा कर रहे थे। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि “खाली सरकारी या सार्वजनिक जमीनों पर अवैध रूप से तंबू गाड़ने की प्रथा अब पूरी तरह बंद होनी चाहिए” और समाज की सज्जन शक्ति को इसके मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा [cite: हमें लैंड जिहाद से जुड़े लोगों से मुकाबले को भी तैयार रहना होगा। खाली जमीन पर तंबू गाड़ने की प्रथा बंद होनी चाहिए। ]।

मारीच और शकुनि का उदाहरण दे ‘मामा-चाचा’ पर कटाक्ष

कथा के प्रसंगों की व्याख्या करते हुए मुख्यमंत्री ने कुसंगति और पारिवारिक विभीषिकाओं पर व्यंग्यबाण चलाए:

  • गलत व्यवस्था का समर्थन: सीएम ने कहा कि रावण का मामा मारीच जानता था कि रावण गलत है, फिर भी वह कुसंग में पड़ा और अंततः प्रभु के हाथों मारा गया [cite: पहले मारीच ने रावण को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन रावण ने उसे मारने की धमकी दी, तब मारीच ने कहा कि यदि मरना ही है तो रावण के हाथों नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के हाथों मरूंगा ताकि उद्धार हो जाए। सीएम ने कटाक्ष किया कि मारीच रिश्ते में रावण का मामा लगता था।]।

  • कुसंग की ओर ले जाते हैं ऐसे रिश्ते: उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब मामा और चाचा अनुचित व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं, तो वे विनाश और कुसंग की तरफ ले जाते हैं, सन्मार्ग की तरफ नहीं [cite: मामा व चाचा अनुचित व्यवस्था में पड़ते हैं तो कुसंग की तरफ ले जाते हैं, सन्मार्ग की तरफ नहीं।]। दुर्योधन के मामा शकुनि ने भी अपनी कुबुद्धि से पूरा महाभारत का युद्ध करवा दिया था।

अदालत ने भी माना— सनातनियों के साथ सैकड़ों वर्षों तक हुआ अन्याय

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए गोरक्षपीठाधीश्वर भावुक और गर्वित नजर आए:

  • जन्म-मरण का प्रश्न: उन्होंने कहा कि संतों ने इस आंदोलन को प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं बल्कि अपनी विरासत और आदर्शों की रक्षा के लिए जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था [cite: संतों ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था। संतों ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था।]।

  • सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सीएम ने याद दिलाया कि २०१९ में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच ने तमाम साक्ष्यों और जगद्गुरु रामभद्राचार्य की गवाही के आधार पर माना कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही रामजन्मभूमि है [cite: 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच के न्यायमूर्तियों ने अपने फैसले में कहा कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं रामजन्मभूमि है। इसे लेकर साक्ष्य-प्रमाण और विद्वानों के वक्तव्य भी दिए गए थे।]। अदालत के एक न्यायमूर्ति ने तो यहां तक कहा था कि स्वामी रामभद्राचार्य जी के वक्तव्य को सुनकर ऐसा लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से वाकई अन्याय हो रहा था [cite: सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य जी के बारे में कहा कि जब मैंने उनके वक्तव्य को सुना तो लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था।]।

रामद्रोहियों को धरती पर कभी जगह नहीं मिली

मुख्यमंत्री ने इतिहास और पौराणिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि जिसने भी प्रभु राम को जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ, लेकिन जिसने भी राम से द्रोह किया उसे इस धरती पर कभी शरण या जगह नहीं मिली। रावण और मारीच जैसे महाप्रतापी लोग उच्च कुल में जन्म लेने के बाद भी अपने रामद्रोह और कुकर्मों के कारण पशुवत मारे गए [cite: मारीच, रावण समेत रामायण काल के अनेक उदाहरण हैं, जो उच्च कुल व श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेने के बाद भी पशुवत मारे जाते हैं, क्योंकि उन्होंने राम के साथ द्रोह किया।]। इसके विपरीत, प्रभु की संगति में आकर पवनसुत हनुमान और विभीषण आज पूरे विश्व में पूजनीय हो गए।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी आगामी ६ महीनों के लिए पुनः एक बार राष्ट्रमंगल की कामना के साथ ‘एकांतिक साधना’ पर प्रस्थान कर रहे हैं। समारोह में स्थानीय विधायक नीरज बोरा ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत व अभिनंदन किया।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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