SC: ममता और DGP को नोटिस, जांच होगी
SC की ममता सरकार को फटकार: “अगर हमने हस्तक्षेप नहीं किया तो देश में अराजकता फैल जाएगी”, ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर लगाई रोक
नई दिल्ली: आई-पैक (I-PAC) छापेमारी मामले में पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को कलकत्ता हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने ममता सरकार की घेराबंदी करते हुए न केवल ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) पर रोक लगा दी, बल्कि बंगाल की कानून व्यवस्था पर ऐसी टिप्पणी की जो अब हेडलाइंस बन गई है।
“लोकतंत्र या भीड़तंत्र?”— सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे को अनसुलझा छोड़ दिया गया, तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी। कोर्ट ने कहा:
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अराजकता का डर: “यदि ईडी द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच नहीं हुई, तो देश में अराजकता फैल जाएगी। अपराधियों को किसी राज्य की एजेंसी के संरक्षण में छिपने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
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कोर्ट या जंतर-मंतर: कलकत्ता हाई कोर्ट में वकीलों द्वारा की गई नारेबाजी पर बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा— “क्या हाई कोर्ट को जंतर-मंतर बना दिया गया है?”
ममता बनर्जी और DGP राजीव कुमार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और अन्य को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
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CBI जांच की मांग: ईडी ने मांग की है कि आई-पैक दफ्तर से कथित तौर पर सबूत हटाने के मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराई जाए।
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फुटेज पर पहरा: कोर्ट ने 8 जनवरी की छापेमारी के दौरान की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का सख्त निर्देश दिया है।
तुषार मेहता की दलील: “यह चोरी और सीनाजोरी है”
ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा:
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सबूतों से छेड़छाड़: आई-पैक ऑफिस में आपत्तिजनक सामग्री थी, जिसे मुख्यमंत्री द्वारा कथित तौर पर हटाया गया।
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मनोबल पर चोट: अगर राज्य सरकारें इसी तरह केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल देंगी, तो सुरक्षा बल हतोत्साहित होंगे। यह एक “शॉकिंग पैटर्न” है।
कपिल सिब्बल का बचाव: “सारे आरोप मनगढ़ंत”
मुख्यमंत्री का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईडी का अपना पंचनामा ही साबित करता है कि मुख्यमंत्री ने कोई उपकरण नहीं हटाया। उन्होंने इसे केवल ‘पूर्वाग्रह’ पैदा करने की कोशिश बताया। हालांकि, जस्टिस मिश्रा ने उनके दावे को ‘विरोधाभासी’ करार दिया।
अगली तारीख: 3 फरवरी
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ईडी अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए एफआईआर की कार्रवाई स्थगित कर दी है। अब इस हाई-प्रोफाइल केस की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी।

