पीएम मोदी ने नौसेना को सौंपे तीन जहाज

भारतीय नौसेना की ताकत में भारी इजाफा! पीएम मोदी ने कोलकाता में देश को समर्पित किए 3 स्वदेशी युद्धपोत; युवाओं के लिए रोजगार की बड़ी घोषणा

कोलकाता:

देश की समुद्री सीमाओं को और अधिक सुरक्षित और अभेद्य बनाने की दिशा में भारतीय नौसेना ने आज एक बहुत बड़ी छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पूरी तरह से स्वदेश निर्मित भारतीय नौसेना के तीन अत्याधुनिक पोतों – आईएनएस दुनागिरी (INS Dunagiri), आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak) और आईएनएस अग्रय (INS Agray) को राष्ट्र को समर्पित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने गर्व जताते हुए कहा कि आज का भारत जहाज निर्माण (Shipbuilding) के क्षेत्र में एक नई सोच और अभूतपूर्व आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रहा है।

🛠️ जहाज रखरखाव और मरम्मत बना ‘राष्ट्रीय मिशन’

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में हो रहे बुनियादी सुधारों को देश के सामने रखा:

  • नीतिगत सुधार: केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में कई बड़े नीतिगत बदलाव किए हैं, जिससे घरेलू स्तर पर निर्माण क्षमता (Domestic Manufacturing) को तेजी से बढ़ावा मिला है।

  • एमआरओ (MRO) पर फोकस: पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि जहाजों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन (Maintenance, Repair, and Overhaul – MRO) को अब एक बड़े ‘राष्ट्रीय मिशन’ के रूप में देखा और विकसित किया जा रहा है।

💼 समुद्री क्षेत्र से पैदा होंगे लाखों नए रोजगार

प्रधानमंत्री ने इन युद्धपोतों को केवल रक्षा उपकरणों के तौर पर नहीं, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य और आर्थिक प्रगति के प्रतीक के रूप में पेश किया:

  • रोजगार की अपार संभावनाएं: श्री मोदी ने कहा कि समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने और देश के युवाओं के लिए रोजगार का एक बहुत बड़ा माध्यम बनने जा रहा है।

  • रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में लाखों नए रोजगार सृजित होने की पूरी संभावना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रक्षा उत्पादन में तेजी आने के साथ-साथ अब भारत के रक्षा निर्यात (Defense Exports) में भी अभूतपूर्व और ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की जा रही है।

🇮🇳 75% से अधिक स्वदेशी और 200 MSMEs का योगदान

नौसेना द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ये तीनों युद्धपोत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक अद्भुत और नायाब उदाहरण हैं:

  • पूरी तरह स्वदेशी तकनीक: इन तीनों ही पोतों के निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग किया गया है।

  • लघु उद्योगों को मजबूती: इन विशाल जहाजों को तैयार करने के सफर में देश के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।

इन तीनों घातक पोतों के शामिल होने से न केवल हिंद महासागर में भारत की निगरानी और युद्ध क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत एक मजबूत जहाज निर्माता देश के रूप में स्थापित होगा।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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