सी.पी. राधाकृष्णन का लेह में योग दिवस

लद्दाख की ऊंचाइयों पर गूंजा योग का संदेश! उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने लेह में मनाया योग दिवस; बोले- ‘यह भारत का मानवता को प्राचीन उपहार’

लेह (लद्दाख):

दुनिया भर के साथ-साथ लद्दाख की दुर्गम और खूबसूरत वादियों में भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य उत्सव देखने को मिला। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज लद्दाख के लेह में आयोजित मुख्य अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस ऐतिहासिक और ऊंचाई वाले क्षेत्र में योग करने के बाद, उपराष्ट्रपति ने देश के सभी नागरिकों से एक स्वस्थ, सुखी और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने की भावुक अपील की।

🧘 ‘शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा को उन्नत करने वाली समग्र प्रणाली’

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने योग के दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व को देश के सामने रखा:

  • ऋषियों का प्राचीन उपहार: उन्होंने कहा कि योग को केवल एक साधारण शारीरिक कसरत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह भारत के महान ऋषियों द्वारा वर्षों के गहरे ध्यान, कठिन तपस्या और आध्यात्मिक खोज के बाद पूरी मानवता को दिया गया एक अमूल्य और प्राचीन उपहार है।

  • समग्र विकास: यह एक ऐसी अनूठी और समग्र प्रणाली है जो एक साथ मानव शरीर का पोषण करती है, अशांत मन को शांत करती है और इंसान की आत्मा को उच्च स्तर पर उन्नत करती है।

👵 ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ – बढ़ती जीवन प्रत्याशा और जिम्मेदारी

इस वर्ष के मुख्य विषय (Theme) पर चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने समाज के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला:

  • बदलती सामाजिक जिम्मेदारी: इस साल की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि आज के दौर में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति और बढ़ती जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) के कारण बुजुर्गों के प्रति समाज की जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। बढ़ती उम्र में निरोग और सक्रिय रहने के लिए योग सबसे बेहतरीन जरिया है।

🏔️ लद्दाख के कठिन जीवन में योग की भूमिका

उपराष्ट्रपति ने लद्दाख के स्थानीय नागरिकों के जज्बे और वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के बीच योग के तालमेल की सराहना की:

  • सहनशक्ति और अनुशासन: अत्यधिक ऊंचाई (High Altitude) वाले इन क्षेत्रों में जीवन जीना बेहद कठिन होता है। इसके लिए विशेष सहनशक्ति, कड़े अनुशासन और मौसम के अनुकूल ढलने की क्षमता की आवश्यकता होती है। योग इन सभी मानवीय गुणों को विकसित करने में सबसे बड़ा मददगार साबित होता है।

  • प्रकृति के साथ सामंजस्य: लद्दाख के लोगों ने हमेशा से ही सादगी, मानसिक लचीलेपन और प्रकृति के साथ अद्भुत सामंजस्य का एक जीवंत उदाहरण पेश किया है। ये सभी मूल्य योग के मूल दर्शन से पूरी तरह मेल खाते हैं।

🛕 महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान केंद्र (MIMC) का दौरा

लेह में योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होने से पहले, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने लेह स्थित महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान केंद्र, देवचन परिसर का विस्तृत दौरा किया। उन्होंने इस प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा पूरे लद्दाख क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक कल्याण, पर्यावरण स्थिरता और विशेष रूप से योग व ध्यान को जन-जन तक पहुंचाने में दिए जा रहे बहुमूल्य और निस्वार्थ योगदान की खुलकर सराहना की।


– सोनू कुमार पत्रकार

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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