Iniya Pongal: ग्लोबल बना पोंगल
Iniya Pongal: पोंगल अब एक ग्लोबल फेस्टिवल, तमिल संस्कृति पूरी मानवता की साझी विरासत — ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का दिखा अटूट संकल्प
नई दिल्ली/मुंबई News: “इनिय पोङ्गल् नल्वाळ्तुक्कल्!” (पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं)। पोंगल के पावन अवसर पर देश और दुनिया भर में फैले तमिल समुदाय को संबोधित करते हुए एक विशेष संदेश साझा किया गया। इस संदेश में पोंगल को केवल एक फसल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाने वाला एक ‘ग्लोबल फेस्टिवल’ बताया गया है।
तमिल संस्कृति: प्राचीन जड़ों से भविष्य की उड़ान
संदेश में तमिल संस्कृति की महानता को रेखांकित करते हुए कहा गया कि यह दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है।
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सांस्कृतिक जुड़ाव: पिछले एक साल में तमिलनाडु के हजार साल पुराने गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में पूजा से लेकर काशी तमिल संगमम् और पंबन ब्रिज के लोकार्पण तक, तमिल इतिहास की महानता को पूरे देश ने महसूस किया है।
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साझी विरासत: यह स्पष्ट किया गया कि तमिल संस्कृति केवल दक्षिण भारत की नहीं, बल्कि पूरे भारत और संपूर्ण मानवता की साझी विरासत है।
किसान: आत्मनिर्भर भारत के मजबूत आधार
तिरुक्कुरल का संदर्भ देते हुए बताया गया कि तमिल संस्कृति में किसान को जीवन का आधार माना गया है।
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अन्नदाता का सम्मान: राष्ट्र निर्माण में किसानों की भूमिका को सर्वोपरि बताया गया। केंद्र सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत किसानों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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युवाओं से आह्वान: विशेष रूप से तमिलनाडु के उन युवाओं की सराहना की गई जो प्रोफेशनल लाइफ छोड़कर नेचुरल फार्मिंग (प्राकृतिक खेती) और एग्रीटेक में क्रांति ला रहे हैं।
प्रकृति के प्रति आभार: ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ और मिशन लाइफ
पोंगल का त्योहार हमें प्रकृति के प्रति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जीवनशैली में आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
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संसाधनों का संरक्षण: मिट्टी की सेहत सुधारना और पानी बचाना भविष्य की पीढ़ी के लिए सबसे जरूरी है।
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प्रमुख अभियान: ‘मिशन लाइफ’, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘अमृत सरोवर’ जैसे अभियान इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
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सस्टेनेबल खेती: ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ और नेचुरल फार्मिंग के जरिए खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया।
एक नया भारत: थाली, जेब और धरती तीनों सुरक्षित
संदेश का समापन एक प्रेरणादायक लक्ष्य के साथ हुआ— “हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे।” आज का भारत अपनी जड़ों से शक्ति लेकर भविष्य की नई संभावनाओं की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है।

