सत्या निकेतन: ’56 इंच की गली’ में खतरा
दिल्ली: साउथ कैंपस के सत्या निकेतन में हादसों का न्योता! ’56 इंच की गली’, लटकते तार और खुले सिलेंडर से छात्रों की सांसें अटकीं
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के प्रमुख एजुकेशनल हब साउथ कैंपस स्थित सत्या निकेतन में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाती एक बेहद खौफनाक तस्वीर सामने आई है। हजारों की संख्या में देश भर से आए छात्र-छात्राओं का ठिकाना बने इस इलाके की संकरी गलियां, जिन्हें छात्र व्यंग्य में ’56 इंच की गली’ कहते हैं, कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। हवा में लटकते नंगे बिजली के तार, दुकानों व पीजी (PG) के बाहर खुले में रखे गैस सिलेंडर और तंग भूलभुलैया जैसी गलियों ने पूरे क्षेत्र को एक ‘पॉवर बम’ में तब्दील कर दिया है।
’56 इंच की गली’ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी साउथ कैंपस के ठीक सामने बसा सत्या निकेतन क्षेत्र कैफे, रेस्टोरेंट और छात्र आवासों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसकी अंदरूनी बसावट बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है:
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नाम ’56 इंच’, चौड़ाई चंद फीट: क्षेत्र की कई गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां दो लोग एक साथ ठीक से निकल भी नहीं सकते। ’56 इंच की गली’ के नाम से मशहूर इन संकरे रास्तों में आपात स्थिति में भागने तक की जगह नहीं है।
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सिर पर झूलते बिजली के तार: पूरी गली में बिजली और इंटरनेट के तारों का मकरजाल (वेब) लटक रहा है। बारिश या शार्ट सर्किट के दौरान यहां कभी भी आग लगने की भयंकर घटना घट सकती है।
खुले में रखे सिलेंडर और अवैध पीजी संचालकों की मनमानी व्यावसायिक गतिविधियों और पीजी के अनियंत्रित विस्तार ने छात्रों की जान को सीधे जोखिम में डाल दिया है:
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बम की तरह रखे सिलेंडर: संकरी गलियों में चल रहे भोजनालयों, फूड स्टॉल्स और पीजी की रसोई के लिए कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर खुले में रखे गए हैं, जिससे गैस लीकेज या आग लगने पर दमकल गाड़ियों का अंदर पहुंचना नामुमकिन होगा।
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हादसे से बेखबर प्रशासन: हाल ही में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हुए निर्माण और आग हादसों के बाद भी सत्या निकेतन में नगर निगम (MCD) और दिल्ली पुलिस की ओर से कोई ठोस ढांचागत कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि दिल्ली सरकार और एमसीडी प्रशासन तुरंत सत्या निकेतन में सेफ्टी ऑडिट कराए, लटकते तारों को भूमिगत (Underground) करे और अवैध रूप से चल रहे पीजी व कैफे पर नकेल कसे ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

