‘चिट्टा’ पर सवाल, पिता की मौत पर बवाल

पंजाब में ‘चिट्टा’ और दमन के आरोप: सवाल पूछने वाले पिता की मौत और सीएम कार्यक्रम के विरोध के बाद पंजाब की AAP सरकार घिरी

चंडीगढ़: पंजाब में नशे (चिट्टा) के बढ़ते जाल और युवाओं की बर्बादी को लेकर सूबे की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार चौतरफा राजनीतिक और प्रशासनिक घिराव का सामना कर रही है। राज्य में नशे की ओवरडोज और अवैध सप्लाई पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के खिलाफ कथित प्रशासनिक दमन और पुलिस प्रताड़ना के आरोपों ने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष का आरोप है कि पंजाब सरकार नशे के सौदागरों पर लगाम लगाने के बजाय, सवाल पूछने वाली जनता और पीड़ित परिवारों की आवाज दबाने में लगी है।

सवाल पूछने की सजा! ज़हर खाने को मजबूर हुए गुलज़ार सिंह की मौत नशे की नाकामी पर वित्त मंत्री से तीखा सवाल पूछने वाले पीड़ित पिता गुलज़ार सिंह की मौत के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया है:

  • वित्त मंत्री से किया था सवाल: गुलज़ार सिंह ने सार्वजनिक रूप से राज्य के वित्त मंत्री से सीधा सवाल किया था कि उनके बेटे तक ‘चिट्टा’ कैसे पहुंच रहा है और सरकार इस जानलेवा सप्लाई चेन को रोकने में पूरी तरह नाकाम क्यों है?

  • दबाव, अपमान और आत्महत्या: परिजनों का आरोप है कि इस सवाल के बाद गुलज़ार सिंह पर लगातार धमकियां दी गईं, उनका सार्वजनिक अपमान किया गया और उनसे जबरन माफी मांगने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। इस प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। कई दिनों तक अस्पताल के चक्कर काटने के बाद उनकी दुखद मौत हो गई।

युवा मोहनजीत सिंह का विरोध और पुलिस प्रताड़ना के आरोप इसी तरह के प्रशासनिक रवैये का एक और मामला तब सामने आया जब युवा मोहनजीत सिंह ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम में नशे के मुद्दे को लेकर खुलकर विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया:

  • पुलिसिया कार्रवाई और आरोप: विरोध के ठीक बाद मोहनजीत सिंह पर पुलिस प्रताड़ना और कड़े प्रशासनिक दबाव के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष और जनता की उठी मांगें विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों का कहना है कि यह सुशासन नहीं बल्कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला दमन है। सरकार का प्राथमिक काम राज्य से नशा खत्म करना है, न कि नशे से पीड़ित परिवारों के सवालों को दबाना। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब में निम्नलिखित प्रमुख मांगें तेजी से उठ रही हैं:

  • वित्त मंत्री का तुरंत इस्तीफा: पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने और मौत के मुंह में धकेलने के नैतिक आरोपों के आधार पर संबंधित वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

  • स्वतंत्र जांच (Independent Probe): गुलज़ार सिंह की मौत और पुलिस प्रताड़ना के मामलों की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने की मांग तेज हो गई है।

  • गुलज़ार सिंह के परिवार को न्याय: पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की अपील की गई है।

पंजाब का आम नागरिक और पीड़ित परिवार अब इस प्रशासनिक नाकामी और दमन के खिलाफ पूरी ताकत से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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