सत्या निकेतन हादसा: जवाबदेही तय करने की मांग
सत्या निकेतन हादसा: ‘न्याय केवल मुआवजे से नहीं मिलेगा, दोषियों की जवाबदेही तय हो’ — रेखा गुप्ता ने उठाये गंभीर सवाल
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के साउथ कैंपस स्थित सत्या निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और भवन सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। इस हादसे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सत्या निकेतन की घटना सिर्फ एक साधारण हादसा नहीं, बल्कि दिल्ली की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर एक गंभीर सवालिया निशान है। उन्होंने मांग की है कि केवल मुआवजे का ऐलान कर मामले को दबाने के बजाय हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
‘जब नियम और जिम्मेदारियां तय हैं, तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे?’ सत्या निकेतन की घटना पर अपनी बात रखते हुए रेखा गुप्ता ने नगर निगम, पुलिस और अग्निशमन विभाग की भूमिका पर सीधे सवाल दागे:
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सुरक्षा मानकों पर सवाल: जब भवन निर्माण, अग्नि-सुरक्षा (Fire Safety), भवन स्वीकृति (Building Plan Sanctions), पीजी (PG) नियमों और किरायेदारों के पुलिस सत्यापन से जुड़े स्पष्ट कानून मौजूद हैं, तो फिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई?
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प्रशासनिक निगरानी की नाकामी: निर्माण कार्य से लेकर सुरक्षा और नियमित प्रशासनिक निगरानी के स्तर पर अधिकारियों ने आंखें क्यों मूंद रखी थीं?
‘न्याय केवल मुआवजे से नहीं, व्यवस्था सुधारने से मिलेगा’ हादसे के पीड़ितों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
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निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई: पूरी व्यवस्था और निर्माण प्रक्रिया की पारदर्शी व निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिनकी भी लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
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दोषियों की जवाबदेही: केवल ठेकेदारों पर गाज गिराने के बजाय उन प्रशासनिक अधिकारियों पर भी आपराधिक मुकदमा दर्ज हो जिनकी शह पर अवैध निर्माण और असुरक्षित पीजी चल रहे थे।
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भविष्य की सुरक्षा: न्याय तभी पूरा माना जाएगा जब व्यवस्था की इन गहरी कमियों को हमेशा के लिए दूर किया जाए ताकि किसी भी छात्र या नागरिक को दोबारा अपनी जान न गंवानी पड़े।
सत्या निकेतन हादसे के बाद अब दिल्ली के अन्य छात्र बहुल इलाकों (जैसे मुखर्जी नगर और जीटीबी नगर) में भी अवैध निर्माणों और असुरक्षित हॉस्टलों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

