अंकिता भंडारी के लिए न्याय हम जवाबदेही की मांग करते हैं और चाहते हैं कि दुष्यंत गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद से हटाया जाए।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को लेकर वर्तमान में देश भर में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ी हुई है।
1. पीड़ित परिवार और प्रदर्शनकारियों की मांगें
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राज्यपाल पद से हटाने की मांग: अंकिता भंडारी के माता-पिता और विपक्ष का आरोप है कि मामले में जिस कथित “VIP” का जिक्र आया था, उससे जुड़े आरोपों की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द की जाए।
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सीबीआई (CBI) जांच की पारदर्शिता: परिवार का कहना है कि जब तक इस मामले की सीबीआई जांच और वीआईपी एंगल का पूर्ण खुलासा नहीं हो जाता, तब तक संवैधानिक पदों पर ऐसी नियुक्तियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।
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2. राजनीतिक बहस और विरोध
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विपक्ष (कांग्रेस व अन्य दल): कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर आरोपियों व प्रभावशालियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है और पीड़ित परिवार के समर्थन में प्रदर्शन किया है।
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सत्ता पक्ष और सरकार का रुख: सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्य आरोपियों (जैसे पुलकित आर्य व अन्य) को अदालत द्वारा कड़ी सजा/आजीवन कारावास सुनाई जा चुकी है। सरकार का यह भी कहना है कि दुष्यंत गौतम पर लगाए गए आरोप अदालत या कानूनी जांच में सिद्ध नहीं हुए हैं। सत्ता पक्ष का तर्क है कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है।
यह मामला फिलहाल सीबीआई जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के अधीन है, और पीड़ित परिवार लगातार पारदर्शी न्याय की गुहार लगा रहा है।
