कल पूरे दिन मीडिया के चरणचुम्बकों ने खबर चलाई और डिबेट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने नेता विपक्ष राहुल गांधी को उनके मार्च पर “फटकार लगाई”
कल पूरे दिन मीडिया के चरणचुम्बकों ने खबर चलाई और डिबेट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने नेता विपक्ष राहुल गांधी को उनके मार्च पर “फटकार लगाई”
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के लिखित ऑर्डर में साफ़ है कि उनकी टिप्पणी संजय राउत जी के लिए थी – और वो उसका क़ानूनी जवाब देंगे
कोर्ट ने कल भी मौखिक मतलब oral टिप्पणी में किसी का नाम नहीं लिया था – तो मीडिया के गिद्धों ने राहुल गांधी का नाम क्यों लिया?
नेता विपक्ष एक संवैधानिक पद है – इन जाहिल पत्रकारों ने एक बार फिर न सिर्फ़ उसकी मर्यादा भंग की है
बल्कि इस बार इन लोगों ने देश के चीफ जस्टिस के हवाले से भी झूठ बोला – और उनका भी अपमान किया
असल में तो यह contempt का मामला बनता है
क्योंकि चीफ जस्टिस या कोर्ट ने राहुल गांधी के लिए कोई टिप्पणी नहीं की थी
लेकिन अब जब सच सामने आ गया है तो क्या यह चरणचुंबक माफ़ी माँगेंगे?
क्या यह समझायेंगे कि जो बात कोर्ट में नहीं कही गई इन्होंने चीफ जस्टिस और राहुल गांधी के हवाले से क्यों और कैसे चलाई?
इनकी छिछली पत्रकारिता का सोर्स कौन था?
क्या BJP के बिना पायजामे वाले प्रवक्ता ने इन लोगों को बरगलाया और फिर ख़ुद कोर्ट का अनादर करते हुए एक भ्रामक झूठी प्रेस वार्ता की?
जो भी हो, फिर से साफ़ है कि गोदी गिद्ध सिर्फ़ झूठ बोलते हैं – सुप्रीम कोर्ट का लिखित ऑर्डर इन सबके मुँह पर एक करारा तमाचा है
