भारत में UPI लेन-देन ने रचा इतिहास
भारत की डिजिटल क्रांति ने रचा इतिहास: वैश्विक स्तर पर UPI का डंका, केंद्रीय बजट से भी बड़ा हुआ सालाना लेन-देन
नई दिल्ली: भारत ने डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में एक ऐसा अभूतपूर्व इतिहास रच दिया है, जिसकी वैश्विक स्तर पर किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। भारत की स्वदेशी डिजिटल भुगतान प्रणाली ‘यूपीआई’ (UPI – Unified Payments Interface) ने न केवल देश के वित्तीय परिदृश्य को बदल दिया है, बल्कि दुनिया भर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन कर उभरी है।
दुनिया के 190 देशों के बजट से बड़ा हुआ UPI लेन-देन ताजा आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, भारत में यूपीआई के जरिए होने वाला सालाना लेन-देन अब भारत के 6 केंद्रीय बजटों के संयुक्त आकार से भी बड़ा हो चुका है। इतना ही नहीं, यह आंकड़ा दुनिया के लगभग 190 देशों के सालाना बजट को पीछे छोड़ चुका है। सब्जी विक्रेताओं और छोटे रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, हर जगह डिजिटल ट्रांजैक्शन की सुलभता ने भारत को वैश्विक फिनटेक (Fintech) लीडर बना दिया है।
राजनीतिक बहस और डिजिटल क्रांति की सफलता डिजिटल इंडिया और यूपीआई की इस ऐतिहासिक सफलता पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि जब इस डिजिटल क्रांति की शुरुआत की गई थी, तब कई विपक्षी दलों ने इसकी व्यवहार्यता पर सवाल उठाए थे और इसका मजाक उड़ाया था। हालांकि, आज भारत की आम जनता और देश का सुदृढ़ तकनीकी ढांचा (Technical Infrastructure) इन तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए नई सफलता की गाथा लिख रहा है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

