UP: शिक्षामित्रों का मानदेय ₹18 हजार हुआ: CM
‘2017 से पहले ₹3,000 पाने वाले शिक्षामित्रों को अब ₹18,000 मानदेय’: CM योगी ने गिनाईं बेसिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियां
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संविदा कर्मियों के कल्याण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक महत्वपूर्ण वक्तव्य सामने आया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और वक्तव्यों के क्रम में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पूर्व और वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के मानदेय में हुए गुणात्मक बदलाव के आंकड़े साझा किए।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में 2017 से पहले शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने उनके योगदान को सम्मान देते हुए मानदेय में भारी बढ़ोतरी की है:
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शिक्षामित्र मानदेय: वर्ष 2017 से पूर्व शिक्षामित्रों को प्रति माह मात्र ₹3,000 का मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर अब ₹18,000 कर दिया गया है।
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अनुदेशक मानदेय: इसी प्रकार, अनुदेशकों के मानदेय में भी महत्वपूर्ण वृद्धि करते हुए इसे अब ₹17,000 प्रति माह कर दिया गया है।
₹5 लाख तक के ‘कैशलेस उपचार’ की स्वास्थ्य सुविधा मानदेय वृद्धि के साथ-साथ राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े इन कर्मियों की सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को गंभीर बीमारियों के समय वित्तीय संकट से बचाने के लिए ₹5 लाख तक के कैशलेस उपचार (Cashless Treatment) की स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की गई है।
‘शिक्षा और शिक्षकों का सम्मान प्राथमिक उद्देश्य’ प्रशासनिक हलकों का कहना है कि बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। मानदेय में की गई इस बढ़ोतरी और कैशलेस हेल्थ कार्ड की सुविधा से प्रदेश भर के हजारों शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के परिवारों को बड़ा संबल मिला है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

