द्वारका एक्सप्रेसवे टनल में पानी, तंज तेज

द्वारका एक्सप्रेसवे टनल में जलभराव पर घमासान: भारी बारिश के बाद ‘गोवा बीच’ वाले तंज से गरमाई राजनीति

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हुई मूसलाधार बारिश के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सियासत एक बार फिर चरम पर पहुँच गई है। लाखों-करोड़ों की लागत से निर्मित बहुचर्चित द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway) की अंडरपास टनल में पानी भरने और जलभराव के दृश्य सामने आने के बाद विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने केंद्र सरकार व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) पर तीखा जुबानी हमला बोला है।

अंडरपास में पानी और लहरें: तंज बना ‘गोवा बीच’ बारिश के बाद द्वारका एक्सप्रेसवे की अंडरपास टनल के भीतर जलजमाव का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो रहा है।

  • विपक्ष का तंज: विपक्षी नेताओं और आम जनता ने निर्माण लागत का हवाला देते हुए तीखा व्यंग्य कसा है। सोशल मीडिया पर यूजर कटाक्ष करते हुए लिख रहे हैं कि करोडों रुपये प्रति किलोमीटर की भारी-भरकम लागत से बने इस प्रोजेक्ट में टनल के भीतर ही ‘गोवा बीच’ जैसा नजारा तैयार कर दिया गया है, जिससे अब दिल्ली वालों को गोवा जाने की जरूरत नहीं रही।

  • आवाजाही हुई प्रभावित: टनल में लबालब पानी भरने और वाहनों के फंसने से दिल्ली और गुरुग्राम के बीच रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों व यात्रियों को भारी ट्रैफिक जाम और असुविधा का सामना करना पड़ा।

गुणवत्ता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर उठे गंभीर सवाल द्वारका एक्सप्रेसवे देश के सबसे महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक अर्बन एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है।

  • निकासी व्यवस्था पर सवाल: पहली ही तेज बारिश में टनल के भीतर इस तरह पानी भर जाने से ड्रेनेज सिस्टम और इंजीनियरिंग डिजाइन की पोल खुल गई है।

  • सार्वजनिक सुरक्षा की चिंता: स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि टनल जैसी बंद संरचना में जलभराव न केवल यातायात को ठप करता है, बल्कि चालकों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

फिलहाल, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और संबंधित निर्माण एजेंसियों द्वारा टनल से पानी निकालने और जल निकासी पंपों को दुरुस्त करने का कार्य शुरू कर दिया गया है, लेकिन इस घटना ने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों और उसकी धरातलीय हकीकत पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine

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