केरल: महिला MLA से हाथापाई पर गरमाई राजनीति
चिरायुनकीझू घटना पर गर्माई राजनीति: कांग्रेस MLA रम्या हरिदास और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई, पुलिस ने दर्ज किया मामला
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: केरल के थिरुवनंतपुरम स्थित चिरायुनकीझू में कांग्रेस की महिला विधायक (पूर्व सांसद) और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आने वाली वरिष्ठ नेता रम्या हरिदास तथा स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच देर रात हुई हिंसक झड़प और हाथापाई के बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक घमासान मच गया है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो वायरल होने और भाजपा द्वारा कांग्रेस आलाकमान व राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण के दावों पर तीखा हमला बोले जाने के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
ब्लॉक पंचायत बैठक और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद
पुलिस सूत्रों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक ब्लॉक पंचायत समिति की बैठक में विधायक रम्या हरिदास के निजी सहायक (PA) की मौजूदगी और उनके फैसलों को लेकर हुई थी। इसके बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता सज़ाद द्वारा सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर विधायक को लेकर कुछ असहज करने वाले पोस्ट किए गए।
-
घर पर हाथापाई: जब विधायक रम्या हरिदास अपने सहयोगियों के साथ मामले पर बातचीत करने गईं, तो वहां स्थानीय नेताओं से तीखी बहस शुरू हो गई।
-
गंभीर आरोप: विधायक ने आरोप लगाया है कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, उनका हाथ मरोड़ा गया और उनके साथ मारपीट व अभद्रता की गई। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस की कार्रवाई: दोनों पक्षों पर क्रॉस FIR दर्ज
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चिरायुनकीझू पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए दोनों पक्षों की शिकायतों पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है:
-
SC/ST एक्ट में मामला: विधायक रम्या हरिदास के बयान के आधार पर पुलिस ने 15 कांग्रेस कार्यकर्ताओं (जिनमें 7 नामजद शामिल हैं) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज किया है।
-
जवाबी शिकायत: वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ता सज़ाद और उनके परिवार की शिकायत पर विधायक और उनके सहयोगियों के खिलाफ भी अनाधिकृत प्रवेश और बहसबाजी की अलग धाराओं में काउंटर केस दर्ज किया गया है।
राजनीतिक घेराबंदी: विपक्षी दलों का राहुल गांधी पर हमला
इस घटना को लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों और भाजपा नेताओं का कहना है कि जब खुद कांग्रेस पार्टी की एक दलित महिला विधायक अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें प्रशासनिक स्तर पर पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है, तो ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का ‘महिला सशक्तिकरण’ और समाज के पिछड़े वर्गों की सुरक्षा पर बात करना केवल एक राजनीतिक दिखावा साबित होता है।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने इस पूरे घटनाक्रम और गुटबाजी की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन इस घटना ने पार्टी के भीतर की अंदरूनी कलह और अनुशासनहीनता को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

- ‘राहुल ना समझो…’: सुधांशु त्रिवेदी का तंज!
https://wp.me/p9lpiM-OB1मजदूरों के लिए नई मुआवज़ा नीति जल्द
