दिव्यांग बच्चों को भत्ता और उपकरण वितरित
दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम: एस्कॉर्ट अलाउंस, स्टाइपेंड और सहायक उपकरणों का वितरण जारी
लखनऊ: दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी दैनिक जीवन शैली को सुगम बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWD) के लिए शुरू की गई इन पहलों का उद्देश्य वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
14,000 दिव्यांग बच्चों को एस्कॉर्ट अलाउंस और 23,000 बालिकाओं को स्टाइपेंड गंभीर और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय पहुँचाने में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता दी जा रही है:
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एस्कॉर्ट अलाउंस (Escort Allowance): राज्य भर में लगभग 14,000 दिव्यांग बच्चों को स्कूल आने-जाने की सुविधा के लिए प्रतिमाह एस्कॉर्ट भत्ता प्रदान किया गया है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है।
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दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेंड: 23,000 से अधिक दिव्यांग छात्राओं की पढ़ाई जारी रखने और ड्रॉप-आउट दर को रोकने के लिए विशेष स्टाइपेंड की व्यवस्था की गई है।
सहायक उपकरणों व ब्रेल पुस्तकों का वितरण दिव्यांग विद्यार्थियों की शारीरिक और शैक्षणिक चुनौतियों को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सहायक सामग्री उपलब्ध कराई गई है:
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23,000 सहायक उपकरण: जरूरतमंद बच्चों की दैनिक आवाजाही और गतिविधियों को आसान बनाने के लिए ट्रायसिकल (Tricycle), व्हीलचेयर (Wheelchair) और हियरिंग एड (Hearing Aid) जैसे 23,000 से अधिक उपकरण वितरित किए गए हैं।
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दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल बुक्स: समावेशी शिक्षा के अंतर्गत 3,000 से अधिक दृष्टिबाधित बच्चों को पढ़ाई के लिए ब्रेल पुस्तकें (Braille Books) उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आए।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं का क्रियान्वयन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और विशेष शिविरों के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है, ताकि हर पात्र दिव्यांग बच्चे को उसका अधिकार और बुनियादी संसाधन समय पर मिल सकें।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

