बरेली से एक साथ 2 राज्यसभा टिकट: जानें कैसे भाजपा ने रुहेलखंड में साधा लोधी व कुर्मी समीकरण
“बरेली के इतिहास में पहली बार: BJP ने एक साथ दिए राज्यसभा के 2 टिकट, समझिए कैसे बदला रुहेलखंड का सियासी गणित!”
बरेली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की भावी राजनीति और रुहेलखंड के सियासी समीकरणों को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। पार्टी ने राज्यसभा चुनावों के लिए घोषित प्रत्याशियों में बरेली/रुहेलखंड अंचल से दो प्रमुख चेहरों—कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार—को एक साथ मैदान में उतारकर पूरे क्षेत्र का राजनीतिक गणित बदल दिया है।
यह पहला मौका है जब रुहेलखंड या बरेली जिले से एक साथ दो नेताओं को उच्च सदन (राज्यसभा) का टिकट सौंपा गया है। इस फैसले के पीछे भाजपा की गहरी चुनावी रणनीति, सामाजिक संतुलन और सपा के ‘पीडीए’ (PDA) काट की योजना मानी जा रही है।
1. पिछड़ों (OBC) का सामाजिक संतुलन और सपा के PDA का मुकाबला
रुहेलखंड क्षेत्र में समाजवादी पार्टी (SP) के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले और घुसपैठ को नाकाम करने के लिए भाजपा ने अपने पारंपरिक और मजबूत पिछड़ा वर्ग (OBC) वोट बैंक की किलेबंदी की है:
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लोधी कार्ड (धर्मपाल सिंह): पांच बार के विधायक और प्रदेश सरकार में पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह लोधी समाज के कद्दावर चेहरे हैं। बदायूं/एटा क्षेत्र के वरिष्ठ लोधी नेता बीएल वर्मा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समाज में संतुलन बनाए रखने और लोधी वोट बैंक को लामबंद रखने के लिए धर्मपाल सिंह पर भरोसा जताया गया है।
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कुर्मी कार्ड (श्रुति गंगवार): पश्चिम उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में कुर्मी समुदाय का बड़ा सियासी प्रभाव है। 8 बार बरेली के सांसद रहे और वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को टिकट देकर पार्टी ने कुर्मी मतदाताओं में अपना संदेश साफ कर दिया है।
2. क्षेत्रीय गुटबाजी पर विराम और नए नेतृत्व की नींव
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बीएल वर्मा vs धर्मपाल सिंह का द्वंद्व समाप्त: क्षेत्र में लोधी नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान की आहट के बीच भाजपा नेतृत्व ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्ठभूमि वाले अनुभवी नेता धर्मपाल सिंह के नाम पर मुहर लगाकर गुटबाजी को शांत कर दिया।
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संतोष गंगवार की विरासत और नया नेतृत्व: संतोष गंगवार को राज्यपाल बनाए जाने के बाद बरेली में उनके सियासी उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं गर्म थीं। आईआईटी (IIT) रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग कर चुकीं श्रुति गंगवार को आगे बढ़ाकर पार्टी ने ‘संतोषपूर्ण नेतृत्व’ की निरंतरता के साथ-साथ युवा, शिक्षित और महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया है।
3. उम्मीदवारों का संक्षिप्त प्रोफाइल और रणनीतिक उद्देश्य
| प्रत्याशी | सामाजिक वर्ग | राजनीतिक पृष्ठभूमि / अनुभव | रणनीतिक उद्देश्य |
| धर्मपाल सिंह | लोधी (OBC) | 5 बार के विधायक, यूपी में कैबिनेट मंत्री, RSS पृष्ठभूमि | लोधी वोटबैंक को साधना, बीएल वर्मा का विकल्प बनना |
| श्रुति गंगवार | कुर्मी (OBC) | IIT रुड़की से इंजीनियर, संतोष गंगवार की पुत्री, सहकारिता में सक्रिय | कुर्मी समुदाय में पकड़ मजबूत करना, शिक्षित-महिला नेतृत्व |
निष्कर्ष
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले रुहेलखंड के अपने गढ़ को बचाए रखने के लिए भाजपा का यह ‘द्वि-मुखी’ दांव अत्यंत प्रभावी माना जा रहा है। एक तरफ जहां पुराने व अनुभवी सांगठनिक चेहरों को तवज्जो दी गई है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षित व नए दौर की कमान सौंपकर कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार किया गया है।
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