ज्ञानेश कुमार ने BJP के साथ मिलकर वोट चोरी से लोकतंत्र की हत्या की साजिश की है।
ज्ञानेश कुमार ने BJP के साथ मिलकर वोट चोरी से लोकतंत्र की हत्या की साजिश की है। ये देशद्रोह है – इस्तीफा तो देना ही होगा।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर विपक्ष और आयोग के बीच कड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है:
विपक्ष और आलोचकों के मुख्य आरोप
फॉर्म-6 और मतदाता सूची में संशोधन: कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची संशोधन (SIR) और ‘फॉर्म-6’ प्रक्रिया में बिना सहमति के एकतरफा बदलाव किए, जिससे मतदाताओं के नाम हटाए गए और सत्ताधारी पार्टी को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गई।
आयोग में सामूहिक निर्णय का अभाव: विपक्ष का दावा है कि अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसले लिए, जो संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के खिलाफ है। इसी आधार पर विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
चुनाव आयोग और सरकार का रुख
आरोपों का खंडन: निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग के सभी निर्णय और मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आदेश कानूनी प्रक्रिया और तय नियमों के तहत ही लिए गए हैं।
इस्तीफे के फर्जी पत्र पर स्पष्टीकरण: सोशल मीडिया पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की फर्जी खबरें और एआई-जनरेटेड पत्र वायरल होने पर चुनाव आयोग ने बयान जारी कर उसे पूरी तरह मनगढ़ंत और गुमराह करने वाला बताया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
अंतरिम आदेश से इनकार: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने या निर्णय पर तुरंत रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है और चुनाव आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता, आयोग का औपचारिक पक्ष देखने के बाद ही आगे का निर्णय होगा।
