ट्रंप-नेतन्याहू के बीच फोन पर महायुद्ध!
ईरान युद्ध को लेकर फोन कॉल पर आपस में भिड़े ट्रंप-नेतन्याहू! इजरायली पीएम बोले- ‘बड़ी भूल कर रहे हैं आप’
(नई दिल्ली): मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के मुद्दे को लेकर फोन पर तीखी और तनावपूर्ण बहस हुई है. दोनों वैश्विक नेताओं के बीच यह जुबानी जंग करीब एक घंटे तक चली, जिससे अब अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में भी दरार आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है.
एक घंटे तक चली तीखी बहस
राजनयिक सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के खिलाफ अगले कदम को लेकर दोनों नेताओं के विचार पूरी तरह अलग नजर आए. जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब युद्ध को लंबा खींचने के मूड में नहीं हैं और शांति समझौते की वकालत कर रहे हैं, वहीं इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ईरान पर और बड़े सैन्य हमलों के पक्ष में अड़े हुए हैं. इसी असहमति ने फोन कॉल के दौरान एक गंभीर बहस का रूप ले लिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने दी कूटनीति और डील की सलाह
फोन कॉल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली पीएम को संयम बरतने की सलाह दी. ट्रंप का रुख निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट था:
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कूटनीति और शांति समझौता: ट्रंप ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थाई समाधान नहीं है. वे एक नई रणनीतिक डील (सौदे) के जरिए ईरान के साथ जारी जंग को तुरंत समाप्त करने के पक्ष में हैं.
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आर्थिक मोर्चे पर ध्यान: ट्रंप का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव से ईरान को घुटनों पर लाया जाना चाहिए.
नेतन्याहू भड़के, बोले- ‘आप बड़ी भूल कर रहे हैं’
ट्रंप की इस शांतिप्रिय कूटनीति पर बेंजामिन नेतन्याहू पूरी तरह भड़क गए. उन्होंने तत्काल सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात दोहराते हुए ट्रंप से कहा कि ईरान पर से दबाव हटाना या उसे संभलने का मौका देना एक ‘बड़ी भूल’ साबित होगी.
नेतन्याहू ने तर्क दिया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसके समर्थित संगठन (प्रोक्सी ग्रुप्स) इजरायल के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा हैं. इसलिए, जब तक ईरान के सैन्य तंत्र को पूरी तरह से नेस्तनाबूद नहीं कर दिया जाता, तब तक इजरायल पीछे नहीं हटेगा.
बढ़ सकता है वैश्विक संकट
इस हाई-प्रोफाइल फोन कॉल के लीक होने के बाद वैश्विक शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है. ट्रंप और नेतन्याहू जैसे दो सबसे करीबी सहयोगियों के बीच रणनीतिक मतभेद सामने आने से यह साफ हो गया है कि मिडल ईस्ट का संकट इतनी आसानी से टलने वाला नहीं है. अब देखना यह होगा कि अमेरिका के इस कड़े रुख के बाद क्या इजरायल अकेले ही ईरान पर हमले की जुर्रत करता है या बैकफुट पर आता है.
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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