NEET लीक: शिवराज के पास 1500 करोड़

NEET पेपर लीक: पार्ट-टाइम टीचर से 1500 करोड़ का मालिक बना शिवराज मोटेगांवकर, CBI जांच में चौंकाने वाला खुलासा

नई दिल्ली/लातूर: NEET-UG पेपर लीक मामले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। इस महाघोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हत्थे एक ऐसा मोहरा लगा है, जिसने महज कुछ ही सालों में अकूत संपत्ति खड़ी कर ली। महाराष्ट्र के लातूर स्थित ‘रेनुकाई करियर सेंटर’ (RCC) के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को लेकर सीबीआई की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि कभी पार्ट-टाइम टीचर रहे शिवराज का साम्राज्य आज करीब 1500 करोड़ रुपये का हो चुका है।

पिछले साल भी लीक हुआ था पेपर!

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि पेपर लीक का यह खेल नया नहीं है। पिछले साल भी NEET का प्रश्नपत्र मुख्य परीक्षा शुरू होने से पहले ही लातूर के रेनुकाई करियर सेंटर (RCC) तक पहुंच गया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर का कथित पेपर लीक माफियाओं और सॉल्वर गैंग के नेटवर्क से बहुत पुराना और गहरा संबंध रहा है। इसी नेटवर्क के दम पर उसने इस पूरे काले साम्राज्य को खड़ा किया।

एम्स (AIIMS) में छात्रों के चयन पर गहराया शक

सीबीआई की रडार पर अब रेनुकाई करियर सेंटर (RCC) के वो छात्र भी आ गए हैं, जिन्होंने पिछले साल अप्रत्याशित सफलता हासिल की थी:

  • एम्स संस्थानों में दाखिला: जांच में सामने आया है कि RCC से पढ़ाई करने वाले कुल 19 छात्रों का चयन देश के विभिन्न प्रतिष्ठित एम्स (AIIMS) संस्थानों में हुआ था।

  • AIIMS दिल्ली में भी एंट्री: इन सफल छात्रों में से दो छात्रों ने एम्स दिल्ली, पांच ने एम्स हैदराबाद और तीन-तीन छात्रों ने एम्स भोपाल और वाराणसी में दाखिला पाया था।

सीबीआई अब इन सभी चयनित छात्रों के दस्तावेजों, परीक्षा केंद्रों और कोचिंग के रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि यह साफ हो सके कि इन्हें वास्तविक योग्यता के आधार पर सीट मिली या लीक पेपर के दम पर।

पार्ट-टाइम टीचर से ‘एजुकेशन माफिया’ बनने का सफर

शिवराज मोटेगांवकर ने अपने करियर की शुरुआत एक बेहद सामान्य पार्ट-टाइम टीचर के रूप में की थी। लेकिन जैसे ही वह मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के कोचिंग क्षेत्र में उतरा, उसकी संपत्ति रॉकेट की रफ्तार से बढ़ने लगी। सीबीआई अब उसकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, बेनामी निवेश और शेल कंपनियों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि 1500 करोड़ रुपये का यह नेटवर्क केवल कोचिंग की फीस से खड़ा नहीं किया जा सकता, इसके पीछे देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर कमाया गया काला धन शामिल है।

सीबीआई जल्द ही शिवराज मोटेगांवकर और उसके करीबियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है, जिससे इस रैकेट में शामिल कई रसूखदार चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


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