शेखपुरा डीएम की शिक्षा विभाग की समीक्षा
शेखपुरा: डीएम शेखर आनंद की सख्त चेतावनी; ई-शिक्षा कोष पर 100% हाजिरी और स्कूलों में बिजली-पानी हर हाल में जरूरी
शेखपुरा जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और स्कूलों में शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी (डीएम) शेखर आनंद ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बुधवार को उनके कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित इस बैठक में डीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पेंच कसे और छात्र हित से जुड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कई कड़े व संवेदनशील दिशा-निर्देश जारी किए।
ई-शिक्षा कोष ऐप पर फोकस और ICT लैब निर्माण में तेजी
बैठक के दौरान डीएम ने डिजिटल अटेंडेंस और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया:
-
शत-प्रतिशत हाजिरी: डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ‘ई-शिक्षा कोष ऐप’ पर 100% ऑनलाइन उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित शिक्षक और प्रधानाध्यापक पर गाज गिरेगी।
-
नियमित निरीक्षण: सभी शिक्षा अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में जाकर स्कूलों का औचक निरीक्षण करने को कहा गया है।
-
कंप्यूटर शिक्षा: स्कूलों में बन रहे नए आईसीटी (ICT) लैब के निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने इसमें तेजी लाने और बच्चों को जल्द कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए।
छात्रों को समय पर मिले छात्रवृत्ति और किताबें
डीएम शेखर आनंद ने छात्र हित की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयसीमा के भीतर काम करने को कहा:
-
स्कॉलरशिप और बुक्स: छात्रों को दी जाने वाली ‘पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप’ (Post Matric Scholarship) समय पर आवंटित हो और सभी बच्चों को सरकार द्वारा मिलने वाली निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।
-
कस्तूरबा गांधी विद्यालय: जिले के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के सुचारू संचालन और वहां रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा व भोजन की गुणवत्ता को परखने के निर्देश दिए गए। साथ ही आगामी त्रि-मासिक प्रतियोगिता को पूरी तरह सफल बनाने की रूपरेखा तैयार की गई।
बुनियादी सुविधाएं: बिजली, पानी और सफाई अनिवार्य
स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए डीएम ने कहा कि जिले के किसी भी सरकारी स्कूल से बुनियादी सुविधाओं के अभाव की शिकायत नहीं आनी चाहिए:
-
शुद्ध पेयजल व बिजली: सभी स्कूलों में साफ-सफाई, निर्बाध बिजली आपूर्ति और बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल (पीने का पानी) की व्यवस्था हर हाल में अनिवार्य रूप से की जाए।
-
निर्माण कार्यों की रिपोर्ट: शिक्षा विभाग के तहत चल रहे सभी असैनिक निर्माण कार्यों (सिविल वर्क) की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट तलब की गई है। इसके साथ ही ‘पीएम पोषण मिड-डे मील योजना’, ‘प्रोजेक्ट स्वाभिमान’ और मॉडल स्कूलों के निर्माण कार्य को गति देने को कहा गया।
संवेदनशील पहल: ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को मिलेगी शिक्षा
एक बेहद संवेदनशील और सराहनीय निर्णय लेते हुए जिला पदाधिकारी ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि जिले के विभिन्न ईंट-भट्ठों पर काम कर रहे प्रवासी व स्थानीय मजदूरों के बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। इसके लिए विभाग वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे मोबाइल स्कूल या विशेष केंद्र) कर हर हाल में इन वंचित बच्चों को पढ़ाई उपलब्ध कराए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से महरूम न रहे।
इसके अलावा, सभी स्कूलों में ‘विद्यालय प्रबंधन समिति’ (VMC) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को सौंपने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मौजूद रहे आलाधिकारी: इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीओ (स्थापना), सभी प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), कनीय अभियंता (JE) और शिक्षा विभाग के अन्य सभी वरीय अधिकारी व कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
(शेखपुरा – उमेश कुमार)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

सम्राट चौधरी कैबिनेट में 13 प्रस्ताव पास!
