शारदीय नवरात्रि का छठा दिन: माँ कात्यायनी के चरणों में नमन, साहस और संकल्प सिद्धि की कामना
“चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना: शारदीय नवरात्रि के षष्ठ दिवस पर करें माँ कात्यायनी के अलौकिक दर्शन और वंदन”
नई दिल्ली/देशभर: शारदीय नवरात्रि के पावन और शक्ति से परिपूर्ण पर्व का छठा दिन यानी षष्ठ दिवस जगतजननी आदिशक्ति माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की आराधना को समर्पित है। इस पवित्र अवसर पर देशभर के शक्तिपीठों और मंदिरों में माँ के जयकारों की गूंज के साथ भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।
1. माँ कात्यायनी का दिव्य स्वरूप और स्तुति
महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में प्रकट होने वाली माँ कात्यायनी को दानवों और पापियों का नाश करने वाली देवी माना गया है। उनके इस पावन स्वरूप का वर्णन इन पंक्तियों में निहित है:
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।
-
अद्भुत आभूषण और वाहन: माँ के एक हाथ में तलवार (चंद्रहास) सुशोभित है और उनका वाहन महाबली सिंह (शार्दूल) है। उनका यह स्वरूप साधकों को भयमुक्त करने और उनके भीतर वीरता व साहस का संचार करने वाला है।
2. साहस, संकल्प और धर्म की रक्षा का संदेश
-
संकल्प सिद्धि की प्रेरणा: नवरात्रि के षष्ठ दिवस पर माँ कात्यायनी के चरणों में नमन कर उनके भक्तों ने अपने जीवन के कठिन लक्ष्यों, संकल्पों को सिद्ध करने के सामर्थ्य और अटूट साहस की प्रार्थना की है।
-
धर्म और न्याय का मार्ग: माँ कात्यायनी का यह स्वरूप हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और जीवन में धर्म व सत्य की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ परिवार की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्रि के छठे दिन की अनंत शुभकामनाएं। माँ कात्यायनी की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और आरोग्य का वास हो। जय माँ कात्यायनी!
“समय कीमती है, हर परिस्थिति में हो भजन”: माया के चक्र और आंतरिक शांति पर आध्यात्मिक चिंतन
