शेखपुरा: प्रोजेक्ट स्वाभिमान शुरू
बिहार: शेखपुरा में ‘प्रोजेक्ट स्वाभिमान’ के तहत 2 हफ्ते में बनेंगे 15 हजार दस्तावेज, 55 ईंट-भट्ठों पर खुलेंगे क्रेच
शेखपुरा: जिला प्रशासन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों और ईंट-भट्ठा श्रमिकों को सरकारी योजनाओं की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। गुरुवार को समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) में जिलाधिकारी शेखर आनंद की अध्यक्षता में ‘प्रोजेक्ट स्वाभिमान’ की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ईंट-भट्ठा श्रमिकों के कल्याण और उन्हें सभी बुनियादी नागरिक अधिकार व सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
सर्वेक्षण में सामने आई बड़ी संख्या, ‘नींव की ईंट फाउंडेशन’ का सहयोग
बैठक के दौरान ‘नींव की ईंट फाउंडेशन’ की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के प्रतिनिधि अंशु कुमार ने हाल ही में किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस सर्वे में यह बात सामने आई है कि ईंट-भट्टों पर काम करने वाले श्रमिकों के एक बड़े हिस्से के पास बुनियादी दस्तावेज (जैसे पहचान पत्र व अन्य कल्याणकारी कार्ड) उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण वे सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
जिलाधिकारी ने दिए ये 3 बड़े निर्देश:
ईंट-भट्ठा श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी शेखर आनंद ने संबंधित अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के सख्त निर्देश दिए:
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डोर-स्टेप डिलीवरी (कदमों पर सेवाएं): अब श्रमिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रशासन ईंट-भट्टों के नजदीक ही विशेष कैंपों का आयोजन कर श्रमिकों के घर के पास ही उनके आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उन्हें प्रदान करेगा।
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15,000 का बड़ा लक्ष्य: डीएम ने आगामी दो सप्ताह (14 दिन) के भीतर 15 हजार से अधिक जरूरी दस्तावेज और सरकारी सेवाएं पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध कराने का एक कड़ा टारगेट तय किया है।
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55 ईंट-भट्ठों पर क्रेच-सह-लर्निंग सेंटर: ईंट-भट्ठा श्रमिकों के बच्चों की देखभाल और उनकी प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिले के 55 ईंट-भट्ठों पर ‘क्रेच-सह-अक्षर लर्निंग सेंटर’ खोले जाएंगे। इसके निर्माण और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी खनिज विकास पदाधिकारी को सौंपी गई है।
अब सफाई कर्मियों का भी होगा व्यापक सर्वे
बैठक में ‘प्रोजेक्ट स्वाभिमान’ के दायरे को बढ़ाते हुए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सफाई कर्मी समुदाय का भी एक व्यापक सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे का उद्देश्य वंचित सफाई कर्मी परिवारों की पहचान करना और उन्हें भी आवश्यक दस्तावेजों व कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित करना है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ‘प्रोजेक्ट स्वाभिमान’ का मुख्य उद्देश्य हर जरूरतमंद तक समय सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय (को-ऑर्डिनेशन) के साथ काम करने को कहा ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार न हो।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, खनिज विकास पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ जिला स्तरीय पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: उमेश कुमार, शेखपुरा (बिहार)

