बरेली: ₹3 करोड़ के फूड कोर्ट पर जांच
बरेली: 3 करोड़ का भव्य फूड कोर्ट मात्र ₹37 हजार महीने पर ठेके पर! योगी सरकार ने बैठाई कड़ी जांच
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा मामला सामने आया है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा करीब ₹3 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए एक अत्याधुनिक फूड कोर्ट को बेहद मामूली रकम पर ठेके पर दे दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के विपरीत सरकारी राजस्व को चूना लगाने के इस खेल की भनक लगते ही लखनऊ से लेकर स्थानीय प्रशासन तक हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने इस पूरे आवंटन खेल की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बरेली के एक प्रमुख और वीआईपी लोकेशन पर बीडीए ने आम जनता और पर्यटकों की सुविधा के लिए ₹3 करोड़ की लागत से एक शानदार फूड कोर्ट का निर्माण कराया था। उम्मीद थी कि इस फूड कोर्ट के संचालन से प्राधिकरण और सरकार को हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। लेकिन, इसके विपरीत:
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कौड़ियों के भाव आवंटन: इस भव्य फूड कोर्ट को एक निजी फर्म या ठेकेदार को महज ₹37,000 प्रति महीने के किराये (ठेके) पर सौंप दिया गया।
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राजस्व को बड़ा नुकसान: एक प्राइम लोकेशन पर बने इतने बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट का किराया ₹37 हजार होना सीधे तौर पर नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुंचाने की ओर इशारा करता है।
लखनऊ तक गूंजी गूंज, शासन स्तर पर जांच शुरू
इस संदिग्ध आवंटन और कौड़ियों के भाव सरकारी संपत्ति को ठेके पर देने की शिकायत सीधे शासन स्तर पर मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इस पर तुरंत कड़ा एक्शन लिया गया है:
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फाइलें तलब: शासन ने बरेली विकास प्राधिकरण से इस फूड कोर्ट के निर्माण की लागत, टेंडर की प्रक्रिया, निकाली गई निविदाओं और आवंटन से जुड़े सभी मूल दस्तावेज और फाइलें तुरंत लखनऊ तलब कर ली हैं।
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जांच कमेटी का गठन: इस पूरे खेल में शामिल अधिकारियों, बाबुओं और ठेकेदार के बीच के कथित गठजोड़ की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है।
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लापरवाही पर होगी कार्रवाई: जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि क्या टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को दबाया गया और जानबूझकर कम रेट पर ठेका पास किया गया। दोषी पाए जाने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
स्थानीय व्यापारिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप
बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) के इस फैसले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। छोटे और मध्यम कारोबारियों का कहना है कि जहां आम दुकानों का किराया हजारों में होता है, वहीं 3 करोड़ के सरकारी प्रोजेक्ट को इस तरह लुटा देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला है।
शासन स्तर से जांच शुरू होने के बाद बीडीए के संबंधित अनुभाग के अधिकारियों और ठेका लेने वाली कंपनी में खलबली मची हुई है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इस टेंडर को निरस्त किया जा सकता है और संबंधित पक्षों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

