सांसदों पर दर्ज आपराधिक मामलों पर रिपोर्ट
प्रीम कोर्ट में न्याय मित्र (अदालत की सहायता के लिए नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता) विजय हंसारिया द्वारा दाखिल हलफनामे में भारतीय राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सांसदों और विधायकों (MPs & MLAs) के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे को लेकर दायर याचिका (अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा) के तहत सौंपी गई है।
संसद और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ मामले
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लोकसभा: 543 में से 251 सांसदों (लगभग 46%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 170 सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले (जिन्हें 5 साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है) दर्ज हैं।
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राज्यसभा: 233 में से 75 सदस्यों (लगभग 32%) के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें से 40 सदस्यों पर गंभीर मामले दर्ज हैं।
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मुख्यमंत्री: देश के 28 राज्यों में से 14 मुख्यमंत्रियों (50%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
लंबित मामलों की स्थिति और राज्यों के आंकड़े
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कुल लंबित मामले: सांसदों और विधायकों (पूर्व व वर्तमान) के खिलाफ देशभर में कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं।
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राज्यों की स्थिति (लोकसभा सांसद):
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केरल: सबसे अधिक 95% सांसदों (20 में से 19) पर आपराधिक मामले हैं।
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तेलंगाना: 82% सांसदों (17 में से 14) पर मामले दर्ज हैं।
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ओडिशा: 76% सांसदों पर मामले दर्ज हैं।
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हरियाणा और छत्तीसगढ़: सबसे कम आंकड़े दर्ज हुए, जहां 1-1 सांसद पर मामले हैं।
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न्याय मित्र के सुझाव
अदालत में दाखिल इस हलफनामे में न्याय मित्र ने मांग की है कि नेताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालतें (Special Courts) केवल सांसदों और विधायकों के मुकदमों पर ध्यान केंद्रित करें और उच्च न्यायालयों द्वारा इनकी प्रगति की मासिक निगरानी की जाए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

