**8वें वेतन आयोग पर टिकीं निगाहें**
आजादी के बाद से 7वें वेतन आयोग तक ₹55 से ₹18,000 हुई बेसिक सैलरी, अब 8वें पे कमीशन पर टिकीं निगाहें
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। देश में आजादी के बाद से लेकर अब तक सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में व्यापक बदलाव आया है। वर्ष 1947 में जहां एक सरकारी कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी महज 55 रुपये हुआ करती थी, वहीं 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के लागू होने के बाद यह बढ़कर 18,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच चुकी है।
हालांकि, मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्चों को देखते हुए देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें अब 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और उसकी सिफारिशों पर टिकी हुई हैं।
1st से 7th Pay Commission: बेसिक सैलरी का सफर
-
1st Pay Commission (1946): आजादी के समय न्यूनतम बेसिक सैलरी 55 रुपये तय की गई थी।
-
2nd से 5th Pay Commission: समय के साथ महंगाई के अनुपात में वेतन संशोधन होते रहे और 5वें वेतन आयोग में बेसिक पे 2,550 रुपये हुई।
-
6th Pay Commission (2006): पे बैंड सिस्टम लागू होने के बाद न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये निर्धारित किया गया।
-
7th Pay Commission (2016): फिटमेंट फैक्टर (2.57) के आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे 18,000 रुपये प्रति माह तय की गई।
8th Pay Commission से क्या हैं उम्मीदें?
वर्तमान में महंगाई भत्ते (DA) के लगातार बढ़ने और जीवन-यापन की लागत में इजाफे के कारण केंद्रीय कर्मचारी संगठन लंबे समय से 8वें वेतन आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग के लागू होने से न केवल फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होगी, बल्कि न्यूनतम बेसिक सैलरी और पेंशन में भी रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिलेगा।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

