2027 तक ₹1.77 लाख पहुंच सकता है सोना

“2027 तक ₹1.77 लाख के पार जा सकता है सोना”: JP मॉर्गन और जेफरीज की भारी तेजी की भविष्यवाणी; जानिए भारत में गणित

विशेष रिपोर्ट: अनिल बेदाग

मुंबई/नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय सर्राफा बाजार में भले ही हाल के दिनों में सोने की कीमतों में मामूली नरमी देखने को मिल रही हो, लेकिन आने वाले समय में सोने की चमक कई गुना बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है। दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (JPMorgan) और अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज (Jefferies) ने सोने की कीमतों को लेकर बेहद बुलिश (तेजी) दृष्टिकोण पेश किया है।

जेपी मॉर्गन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2026 के अंत तक $4,500 प्रति औंस और 2027 के मध्य तक $5,000 प्रति औंस के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। वहीं, जेफरीज का अनुमान इससे भी आगे बढ़कर 2027 तक $10,000 प्रति औंस के पार जाने का है।

भारत में कितना महंगा होगा सोना? समझिए इम्पोर्ट ड्यूटी और टैक्स का गणित

चूंकि भारत अपनी कुल सोने की खपत का बड़ा हिस्सा आयात (Import) करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय डॉलर-प्रति-औंस की कीमतों का सीधा असर भारतीय रुपए में 10 ग्राम सोने के भाव पर पड़ता है:

  • अंतरराष्ट्रीय भाव का रूपांतरण: $5,000 प्रति औंस के आधार पर 10 ग्राम सोने का मूल बेस प्राइस लगभग ₹1,54,093 बैठता है।

  • 15% इम्पोर्ट ड्यूटी का प्रभाव: भारत सरकार द्वारा सोने पर लगाए जाने वाले 15% आयात शुल्क (Import Duty) के जुड़ने से इसका गणित इस प्रकार बदल जाता है:

    • 10 ग्राम सोने की बेस कीमत: ₹1,54,093

    • 15% आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी): ₹23,113

    • भारत में अनुमानित कुल कीमत: ₹1,77,206 प्रति 10 ग्राम

  • जेफरीज के $10,000 के परिदृश्य में: यदि जेफरीज का $10,000 प्रति औंस का अनुमान सच साबित होता है, तो भारत में 10 ग्राम सोने का भाव ₹3.5 लाख के स्तर को भी पार कर सकता है।

क्यों आ रही है सोने में इतनी भारी तेजी? 4 प्रमुख कारण

  1. केंद्रीय बैंकों की ताबड़तोड़ खरीदारी: विश्वभर के सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को सुरक्षित करने के लिए सोना खरीद रहे हैं। चीन का केंद्रीय बैंक (PBOC) लगातार 21 महीनों से सोने की शुद्ध खरीदारी कर रहा है।

  2. अमेरिकी ब्याज दरें और कमजोर डॉलर: जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है या रियल यील्ड गिरती है, तब सोना रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) कम हो जाती है। कमजोर डॉलर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सोने को और आकर्षक बनाता है।

  3. वैश्विक कर्ज और ‘करेंसी डिबेसमेंट’ की चिंताएं: जेपी मॉर्गन के अनुसार, अमेरिकी सरकारी कर्ज का बढ़ता स्तर और मुद्राओं के अवमूल्यन (Currency Debasement) की आशंकाएं निवेशकों को सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven) के रूप में सोने की ओर आकर्षित कर रही हैं।

  4. घरेलू डिस्काउंट और मांग: भारतीय बाजार में वर्तमान में पुरानी ज्वैलरी की री-साइक्लिंग बढ़ने से भले ही भाव इम्पोर्ट पैरिटी से थोड़े नीचे चल रहे हों, लेकिन आगामी त्योहारी सीजन (दीवाली) और शादी-ब्याह के सीजन में मांग तेजी से लौटने की पूरी उम्मीद है।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ निवेशकों को सलाह देती है कि वे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए अपने पोर्टफोलियो में सोने जैसे सुरक्षित परिसंपत्ति वर्ग (Asset Class) को उचित संतुलन के साथ शामिल करें।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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