नेपाल को 10 अरब का झटका: भारत से गुहार

“भारत के कड़े आर्थिक फैसले से बदला परिदृश्य”: 10 अरब रुपये के नुकसान के बाद दिल्ली पहुंचा नेपाल; जूट व स्टील से सेफगार्ड ड्यूटी हटाने की गुहार

नई दिल्ली: भारत और नेपाल के बीच हाल के दिनों में उभरे व्यापारिक मुद्दों के बीच नेपाल ने भारत के समक्ष अपने निर्यात को लगे झटके पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय भारत-नेपाल अंतर-सरकारी उपसमिति (Inter-Governmental Sub-Committee) की बैठक में नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने जूट और स्टील उत्पादों पर भारत द्वारा लगाई गई ‘सेफगार्ड ड्यूटी’ (Safeguard Duty) और सीमा शुल्क प्राथमिकताओं को हटाने की औपचारिक मांग की है।

नेपाल सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा देश के घरेलू उद्योगों के संरक्षण के लिए उठाए गए इस कड़े कदम से नेपाल के स्टील और जूट निर्यात को 10 अरब रुपये से अधिक का भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक: क्या रहे मुख्य बिंदु?

वाणिज्यिक और व्यापारिक गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच 16-17 सितंबर को नई दिल्ली में अहम वार्ता संपन्न हुई:

  • प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व: नेपाल की ओर से उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव बुद्ध बहादुर गुरुंग ने नेतृत्व किया, जबकि भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव उज्ज्वल कुमार घोष ने किया।

  • जूट और स्टील निर्यात पर पड़ा बुरा असर: नेपाली पक्ष ने दलील दी कि भारत द्वारा सेफगार्ड ड्यूटी लागू करने के बाद से उनके जूट और स्टील उत्पादों की भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे वहां की विनिर्माण इकाइयों को भारी क्षति हुई है।

  • ड्यूटी हटाने की गुजारिश: नेपाल ने द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए भारत से जूट और स्टील पर से अतिरिक्त शुल्क हटाने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने का आग्रह किया।

भारतीय उद्योगों के संरक्षण के लिए जरूरी था फैसला

भारत सरकार द्वारा सेफगार्ड ड्यूटी लागू करने का उद्देश्य घरेलू विनिर्माताओं और भारतीय स्टील व जूट उद्योग को सस्ते आयात के प्रतिकूल प्रभाव से बचाना था:

  1. घरेलू बाजार का संतुलन: भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि देश के आंतरिक आर्थिक हितों, एमएसएमई (MSME) सेक्टर और स्थानीय विनिर्माताओं की सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत ही सेफगार्ड कदम उठाए गए हैं।

  2. व्यापार संतुलन और समीक्षा: बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने अनाधिकृत व्यापार के नियंत्रण, पारगमन सुविधाओं (Transit Facilities) और बुनियादी ढांचे में सुधार पर भी चर्चा की, लेकिन शुल्क में राहत देने का अंतिम फैसला भारत के आर्थिक हितों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ भारत के राष्ट्रीय व आर्थिक हितों की सर्वोपरिता का समर्थन करती है और यह मानती है कि क्षेत्रीय व्यापार संतुलन स्थापित करने में भारत की नीतियां दूरदर्शी और न्यायसंगत हैं।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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