सामान्य टेस्ट से गालब्लैडर कैंसर की पहचान
ब लिवर टेस्ट से ही मिल जाएंगे गालब्लैडर कैंसर के शुरुआती संकेत; गोरखपुर विश्वविद्यालय और कैंसर अस्पताल के संयुक्त शोध में बड़ा खुलास
(गोरखपुर/उत्तर प्रदेश): गालब्लैडर (पित्ताशय) के कैंसर से जूझ रहे मरीजों और चिकित्सा जगत के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। गोरखपुर विश्वविद्यालय, एचपीपी कैंसर अस्पताल और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय (मगोवि) के वैज्ञानिकों व डॉक्टरों द्वारा किए गए एक संयुक्त शोध में यह ऐतिहासिक तथ्य सामने आया है कि अब एक बेहद सामान्य रक्त (ब्लड) और लिवर जांच के जरिए ही गालब्लैडर कैंसर के शुरुआती संकेतों की सटीक पहचान की जा सकती है।
यह महत्वपूर्ण अध्ययन चिकित्सा जगत की प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जर्नल ‘डिस्कवर ऑन्कोलॉजी’ (Discover Oncology) में भी प्रकाशित किया जा चुका है।
कम लागत में होगी कैंसर की पहचान, बचेगा मरीजों का समय
इस शोध के परिणाम उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होंगे जहां बेहद महंगे और आधुनिक कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट (जैसे पीईटी स्कैन या एमआरआई) की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं:
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शुरुआती दौर में पहचान: गालब्लैडर कैंसर के लक्षण अक्सर तब सामने आते हैं जब बीमारी आखिरी स्टेज पर पहुंच जाती है। लेकिन इस शोध के बाद, सामान्य लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और रूटीन ब्लड टेस्ट के जरिए ही डॉक्टर इसके शुरुआती लक्षणों को पकड़ सकेंगे।
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कम लागत में इलाज संभव: महंगे टेस्ट की तुलना में यह सामान्य जांच बेहद सस्ती होती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को समय रहते बहुत कम खर्च में इस जानलेवा बीमारी का पता लगाने और सही समय पर इलाज शुरू करने में अभूतपूर्व मदद मिलेगी।
तीन प्रमुख संस्थानों का संयुक्त प्रयास
इस महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी मेडिकल रिसर्च को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित तीन प्रतिष्ठित संस्थानों ने मिलकर अंजाम दिया है, जिसमें गोरखपुर विश्वविद्यालय, एचपीपी कैंसर अस्पताल और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय (मगोवि) के शोधकर्ता व विशेषज्ञ शामिल रहे। इस सफल अध्ययन के बाद अब कैंसर स्क्रीनिंग की दिशा में एक नई और बेहद सस्ती रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद बढ़ गई है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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