भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता संपन्न
भारत और जापान के बीच रक्षा नीति वार्ता का 8वां दौर संपन्न: मुक्त व नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए प्रतिबद्धता
तोक्यो/नई दिल्ली: भारत और जापान ने एक बार फिर एक मुक्त, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के प्रति अपनी साझा और मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई है। जापान की राजधानी तोक्यो में आयोजित ‘भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता’ के आठवें दौर में दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर बेहद व्यापक और गंभीर चर्चा संपन्न हुई।
इस उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व देश के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वहां के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के रक्षा उपमंत्री कानो कोजी ने की।
इन उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग पर बनी सहमति
वार्ता के दौरान पिछली बैठकों के बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके साथ ही भविष्य की रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर विशेष बल दिया गया:
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तकनीक और साइबर सुरक्षा: दोनों देशों ने रक्षा उद्योग, नई और उन्नत तकनीक (Advanced Technology), साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष (Space) और अन्य उभरते सुरक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को तेजी से बढ़ाने पर चर्चा की।
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सैन्य और समुद्री सहयोग: बैठक में सैन्य आदान-प्रदान, दोनों देशों के संयुक्त मुख्यालयों के बीच आपसी समन्वय, समुद्री सुरक्षा सहयोग और संयुक्त रक्षा अभ्यासों की समीक्षा की गई।
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समुद्री प्रौद्योगिकी: क्षमता निर्माण के साथ-साथ रक्षा उपकरण और विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी (Maritime Technology) के आदान-प्रदान को लेकर संस्थागत सहयोग की रूपरेखा को और सुदृढ़ करने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने इस बढ़ते रक्षा दायरे का स्वागत किया।
रक्षा सचिव ने की जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से मुलाकात
रक्षा नीति वार्ता के इतर, भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से एक विशेष शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जापानी रक्षा मंत्री को शुभकामनाएं और आदर प्रेषित किया।
रक्षा सचिव ने भारत के रक्षा विनिर्माण और सामरिक क्षेत्र में जापान द्वारा किए जा रहे निरंतर सहयोग की मुक्त कंठ से सराहना की। दोनों नेताओं ने इस बात पर पूर्ण सहमति जताई कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए ‘भारत-जापान विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी’ (Special Strategic and Global Partnership) के तहत व्यावहारिक सहयोग को और अधिक मजबूत और प्रगाढ़ बनाना दोनों देशों के हित में है।
- (गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
- (एडिटर (Allrights Magazine)

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