कोक स्टूडियो का नया गीत कचौड़ी गली
इतिहास के भूले जख्मों को सुरों में जिंदा करती ‘कचौड़ी गली’: कोक स्टूडियो भारत का नया गीत बना एहसासों का सफर; रेखा भारद्वाज की आवाज ने दी रूह
(मुंबई – अनिल बेदाग): प्रथम एंग्लो-बर्मा युद्ध की अनकही पीड़ा, बनारस की ऐतिहासिक तंग गलियों की मिट्टी से उठती एक विरहिणी स्त्री की दर्दभरी आवाज़ और भारतीय लोकसंगीत की रूह—‘कोक स्टूडियो भारत’ (Coke Studio Bharat) का नया और बेहद अनूठा गीत ‘कचौड़ी गली’ रिलीज़ हो गया है। यह गीत सिर्फ एक पारंपरिक म्यूजिक ट्रैक नहीं है, बल्कि इतिहास के पन्नों में दफन हो चुके पुराने जख्मों और अपनों से बिछड़ने के दर्द को सुरों के माध्यम से महसूस कराने वाला एक गहरा भावनात्मक सफर बनकर उभरा है।
युद्ध और विरह की अनकही दास्तान: रंगून गए पति का इंतजार
‘कचौड़ी गली’ गीत की पृष्ठभूमि बेहद भावुक और ऐतिहासिक है। यह गीत उस लाचार पत्नी के नजरिए से पूरी कहानी बयां करता है, जिसके पति को अंग्रेजों द्वारा औपनिवेशिक काल में जबरन युद्ध लड़ने के लिए सुदूर ‘रंगून’ (बर्मा) भेज दिया जाता है।
अचानक हंसते-खेलते घर के सूने हो जाने का मर्मस्पर्शी दर्द, पति की सुरक्षित वापसी की अंतहीन बेचैनी और जुदाई की असहनीय टीस को इस पारंपरिक लोकधुन में इतनी शिद्दत और गहराई से पिरोया गया है कि इसे सुनने वाला हर संगीतप्रेमी खुद को बनारस की उन्हीं ऐतिहासिक गलियों और बीते दौर में खड़ा महसूस करने लगता है।
रेखा भारद्वाज और उत्पल उदित की जुगलबंदी; ख्वाब का गहरा असर
इस कलात्मक गीत को संगीत जगत के कई दिग्गज और हुनरमंद कलाकारों ने मिलकर सजाया है:
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रेखा भारद्वाज की रूहानी आवाज: अपनी अनूठी और मखमली आवाज के लिए मशहूर गायिका रेखा भारद्वाज ने इस गीत को अपनी आत्मा दी है। उनके गाने का अंदाज विरह के इस दर्द को सीधे सुनने वाले के दिल के पार ले जाता है।
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उत्पल उदित का अनूठा अंदाज: गायक उत्पल उदित ने इस गीत में भोजपुरी लोकसंगीत (Bhojpuri Folk) की सादगी, उसके ठेठ मिजाज और कच्चेपन को बेहद खूबसूरती के साथ जिंदा रखा है।
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ख्वाब की मौजूदगी: संगीतकार ‘ख्वाब’ (Khwaab) की मौजूदगी इस पूरे म्यूजिक ट्रैक में एक बेहद शांत, ठहराव भरा लेकिन गहरा और जादुई असर छोड़ती है, जो आधुनिक और लोक संगीत का बेहतरीन फ्यूजन है।
लोककथाएं अतीत नहीं, दिलों में सांस लेती हैं
‘कचौड़ी गली’ के इस बेहतरीन और सफल प्रयोग के जरिए ‘कोक स्टूडियो भारत’ ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर यह साबित कर दिया है कि हमारी मिट्टी से जुड़ी लोककथाएं और ऐतिहासिक घटनाएं सिर्फ अतीत का हिस्सा बनकर किताबों में दफन नहीं होतीं, बल्कि वे आज के दौर में भी संगीत के माध्यम से हमारे दिलों में जिंदा हैं और सांस लेती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर इस गाने को संगीतप्रेमियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है और लोग इसके गहरे लिरिक्स व कांसेप्ट की खूब सराहना कर रहे हैं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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