संजय दत्त की बेटी त्रिशाला का दर्द
‘कोई बात करने वाला नहीं…’ संजय दत्त की बेटी त्रिशाला ने मां के निधन के बाद बयां किया बचपन का दर्द; बताया स्टार किड होने की दर्दनाक सच्चाई
बॉलीवुड सुपरस्टार संजय दत्त (Sanjay Dutt) की बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त भले ही फिल्मी चकाचौंध से दूर न्यूयॉर्क में रहती हैं, लेकिन वे अक्सर अपनी निजी जिंदगी और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करती हैं। त्रिशाला अब आधिकारिक तौर पर न्यूयॉर्क में एक लाइसेंस्ड मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट (LMFT) और मनोचिकित्सक (Psychiatrist) बन चुकी हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान त्रिशाला ने अपने बचपन के गहरे दर्द (Childhood Trauma), मां को खोने के निजी नुकसान, स्कूल में बुली (Bully) किए जाने और स्टार किड होने के पीछे छिपे अकेलेपन के अनुभवों को साझा कर सबको भावुक कर दिया।
चम्मच चांदी की थी, लेकिन जिंदगी बेहद दर्दनाक थी
आमतौर पर आम लोगों के बीच ‘स्टार किड’ शब्द सुनते ही प्रिवलेज, ग्लैमर, शोहरत और एक बेहद ऐशो-आराम से भरी आलीशान जिंदगी की तस्वीर सामने आती है। समाज में अक्सर कहा जाता है कि ये बच्चे तो मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। लेकिन त्रिशाला ने इस धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसके पीछे का एक स्याह और दर्दनाक पहलू उजागर किया। उन्होंने बताया कि इस तथाकथित ग्लैमर के पीछे की असल सच्चाई उनके लिए कहीं अधिक मानसिक प्रताड़ना और अकेलेपन से भरी हुई थी।
8 साल की उम्र में सिर से उठा मां का साया; पापा नहीं थे साथ
त्रिशाला दत्त की मां और संजय दत्त की पहली पत्नी ऋचा शर्मा का साल 1996 में महज 32 वर्ष की आयु में ब्रेन ट्यूमर के कारण असमय निधन हो गया था। उस दर्दनाक वक्त को याद करते हुए त्रिशाला ने बताया कि जब उनकी मां इस दुनिया से गईं, तब वह केवल आठ साल की एक मासूम बच्ची थीं।
मां के चले जाने के बाद उनके पास कोई ऐसा नहीं था जिससे वे अपने मन की बात कह सकें या अपना दर्द बांट सकें। उस दौरान उनके पिता संजय दत्त भी अपनी निजी और कानूनी मुश्किलों व फिल्मी व्यस्तताओं के कारण उनके साथ मौजूद नहीं रह सके थे। मां की मौत और पिता का साथ न होना, उनके जीवन का सबसे बड़ा ट्रामा बन गया, जिससे उबरने में उन्हें सालों लग गए। मां के निधन के बाद उनका पालन-पोषण न्यूयॉर्क में उनके नाना-नानी और मौसी ने किया।
मोटापे के कारण स्कूल में होना पड़ा ‘बॉडी शेमिंग’ और बुली का शिकार
पॉडकास्ट में त्रिशाला ने अपने स्कूल के दिनों के एक और कड़वे सच से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि बचपन में वे काफी ओवरवेट (मोटी) थीं। इस वजह से स्कूल में उनके सहपाठी और अन्य बच्चे उनका काफी मजाक उड़ाते थे और उन्हें बुरी तरह बुली (प्रताड़ित) किया करते थे। एक तरफ मां को खोने का गम और दूसरी तरफ स्कूल में मिलने वाला यह बर्ताव उनके मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा था।
इन्हीं सब मुश्किलों और मानसिक दुखों से गुजरने के बाद ही त्रिशाला ने खुद को मजबूत बनाया और बाद में मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत को समझते हुए इसी क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी की। आज वे एक सफल थेरेपिस्ट के रूप में दूसरों के मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने का काम कर रही हैं। सोशल मीडिया पर त्रिशाला के इस बेबाक और साहसी इंटरव्यू की लोग खूब सराहना कर रहे हैं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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