हनुमानगढ़ी नमाज़ विवाद पर घमासान

अयोध्या के हनुमानगढ़ी में कभी नहीं हुई नमाज़: पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के दावे को खारिज किया


अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़े जाने और इफ्तार पार्टी के आयोजन को लेकर छिड़ा विवाद अब गहराता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस 23 साल पुराने दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.

गोंडा के नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि हनुमानगढ़ी में नमाज़ पढ़े जाने का दावा पूरी तरह से गलत और तथ्यहीन है.

बचपन से हनुमानगढ़ी जा रहा हूं, वहां कभी नमाज़ नहीं हुई: बृजभूषण शरण सिंह

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देते हुए कहा:

  • दावे का खंडन: “मैं बचपन से ही अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन-पूजन करता रहा हूं. हनुमानगढ़ी में कभी भी नमाज़ नहीं पढ़ी गई है, और इस संबंध में किए जा रहे सभी दावे पूरी तरह असत्य हैं.”

  • ऐतिहासिक संदर्भ: उन्होंने आगे कहा कि हनुमानगढ़ी का निर्माण बाराबंकी के एक मुस्लिम नवाब ने कराया था, जिसका उल्लेख आज भी वहां लगे पत्थर के शिलाखंड पर मौजूद है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सीएम योगी को खुली चुनौती

गौरक्षा यात्रा के सिलसिले में गोंडा पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया:

शंकराचार्य का बयान: “हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कब नमाज़ पढ़ी गई? सरकार इसे साबित करके दिखाए, वरना झूठ बोलने के लिए मुख्यमंत्री अपनी गद्दी छोड़ें! राम मंदिर दान चोरी प्रकरण और जनहित के वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस 23 साल पुराने मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है.”

क्या है 23 साल पुराना यह पूरा विवाद?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अपने अयोध्या दौरे के दौरान वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी परिसर के आसपास कथित तौर पर नमाज़ पढ़े जाने और इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किए जाने का मुद्दा उठाकर सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी थी.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अपनाए जा रहे ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के रुख और राम मंदिर दान से जुड़े हालिया विवादों के बीच 23 साल पुराने इस वाकये के फिर से सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है.


  • (गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

      (एडिटर (Allrights Magazine)

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