बरेली: D-25 में अवैध निर्माण व व्यापार पर BDA सुस्त

बरेली में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और रिहायशी इलाके में सीमेंट-बजरी के गैरकानूनी व्यापार का भंडाफोड़: BDA की कार्रवाई पर खड़े हुए सवाल

बरेली: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ जहां सरकारी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए सख्त अभियान चला रही है, वहीं बरेली के स्थानीय प्रशासनिक महकमे और बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की लचर कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला शहर के के.के. अस्पताल रोड स्थित जगदीश बिहार चौराहे का है, जहां भवन संख्या D-25 में रजिस्ट्री की सीमा से दोगुना निर्माण कर न सिर्फ सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया, बल्कि घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में सीमेंट, रेता और बजरी का जानलेवा अवैध व्यापार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।

41 मीटर की रजिस्ट्री पर 75 वर्ग गज में अवैध निर्माण, आवासीय को बनाया व्यावसायिक प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, के.के. अस्पताल रोड स्थित भवन संख्या D-25 के भवन स्वामी विपिन शर्मा (पुत्र सतीश चन्द्र शर्मा) एवं ऊषा देवी (पत्नी सतीश चन्द्र शर्मा) के नाम पर केवल 48 वर्ग गज (लगभग 41 वर्ग मीटर) जमीन की रजिस्ट्री दर्ज है।

लेकिन मौके पर भू-माफियागिरी का खेल दिखाते हुए लगभग 75 वर्ग गज जमीन पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया गया है। इस दौरान आसपास की कीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाया गया। इतना ही नहीं, बीडीए (BDA) बायलॉज और अदालत के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत मकान को व्यावसायिक परिसर में तब्दील कर दिया गया।

घनी आबादी में धूल-मिट्टी का जानलेवा व्यापार, स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल रिहायशी इलाके में बिना किसी वैध अनुमति के चलाए जा रहे सीमेंट, रेता और बजरी के इस अनधिकृत व्यापार के कारण आसपास रहने वाले नागरिकों और राहगीरों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उड़ती धूल और रेत के कणों से क्षेत्र में सांस और श्वास संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी संदेह पैदा करती है।

20 मार्च 2024 को बीडीए ने दिखाई थी ध्वस्तीकरण की फाइल, फिर ठंडे बस्ते में डाला मामला सूत्रों के अनुसार, Bareilly Development Authority (BDA) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए 20 मार्च 2024 को ध्वस्तीकरण (Demolition) और चालान की कागजी कार्यवाही तो की थी, लेकिन वह महज खानापूरी साबित हुई।

  • न सील हुई, न चला बुलडोजर: चालान काटने के महीनों बीत जाने के बाद भी बीडीए अधिकारियों ने न तो इस अवैध व्यावसायिक परिसर को सील किया और न ही अवैध हिस्से पर बुलडोजर चलाया।

प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की ढिलाई से साफ जाहिर होता है कि बीडीए के निचले स्तर के कर्मचारियों और अवैध निर्माणकर्ताओं के बीच कोई साठगांठ चल रही है, जिसके चलते सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के राज्य सरकार के आदेश ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। स्थानीय निवासियों ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बीडीए वीसी और शासन से तत्काल अवैध कब्जा ढहाने तथा दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: