सदन में असभ्य टिप्पणी: सभापति दुखी
राज्यसभा सभापति का सदस्यों को सख्त संदेश: “सदन में अभद्र और अशोभनीय टिप्पणियां अस्वीकार्य, सांस्कृतिक विविधता का रखें सम्मान”
विशेष संसद एवं राष्ट्रीय राजनीति ब्यूरो: नई दिल्ली
रिपोर्ट: ऑल Rights मैगज़ीन ब्यूरो
संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में सदस्यों द्वारा एक-दूसरे के भाषण के दौरान की जा रही अभद्र और अशोभनीय टिप्पणियों पर राज्यसभा के सभापति ने कड़ा संज्ञान लिया है। सदन की मर्यादा और गरिमा बनाए रखने के लिए सभापति द्वारा एक विशेष टिप्पणी जारी करते हुए सभी सांसदों को आचरण में सुधार लाने और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करने की सख्त नसीहत दी गई है।
सभापति द्वारा की गई टिप्पणी का मूल पाठ (Original Text)
अध्यक्ष महोदय: “माननीय सदस्यगण, सदन में अन्य सदस्यों के भाषण में बाधा डालते हुए कुछ सदस्यों द्वारा अभद्र और अशोभनीय टिप्पणियां किए जाने के मामले मेरे संज्ञान में आए हैं। मैं आप सभी से निवेदन करता हूं कि आप अपने साथी सदस्यों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं। हमारी संस्कृति अनूठी है और इसमें विविध क्षेत्रीय संस्कृतियां समाहित हैं। हमारे साथियों की सांस्कृतिक परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान का अनादर नहीं होना चाहिए।”
सांस्कृतिक पहचान और गरिमा की रक्षा की अपील
सभापति ने अपने संदेश में विशेष रूप से भारत की विविधता और भाषाई-क्षेत्रीय संस्कृतियों का हवाला देते हुए निम्नलिखित बातें रेखांकित कीं:
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भावनाओं का सम्मान: किसी भी सदस्य को अपने सहकर्मी के भाषण में बाधा डालने या ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है जो किसी की भावनाओं को आहत करे।
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क्षेत्रीय अस्मिता का अनादर न हो: भारत की अनूठी संस्कृति में विभिन्न राज्यों की परंपराएं शामिल हैं; किसी भी साथी सांसद की क्षेत्रीय पहचान या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का मजाक या अनादर कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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संसदीय गरिमा: उच्च सदन के गरिमामय माहौल को बनाए रखने के लिए सभी दलों के सांसदों से सहयोग की अपेक्षा की गई है।
सदन में लगातार हो रहे हंगामे और व्यक्तिगत छींटाकशी के बीच सभापति की यह टिप्पणी सांसदों के आचरण को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है।
राजनीतिक ब्यूरो: नई दिल्ली
ऑल Rights मैगज़ीन (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)

