मेटा एल्गोरिदम विवाद: मालवीय का हमला
सोशल मीडिया एल्गोरिदम के पक्षपात पर विवाद: अमित मालवीय ने ‘मेटा’ पर उठाए सवाल
नई दिल्ली – सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता और उनके एल्गोरिदम के कथित पक्षपात को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए डेटाबीइंग्स के आंकड़ों के अनुसार, इंस्टाग्राम पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को 1.8 करोड़ लोगों तक पहुंचाया गया, जबकि झारखंड के रांची में हुए प्रदर्शन को बेहद कम रीच मिली।
बीजेपी नेता अमित मालवीय का बड़ा हमला
भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मेटा’ (Meta) पर निशाना साधते हुए इसके एल्गोरिदम और पक्षपातपूर्ण रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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कंटेंट को असमान बढ़ावा देने का आरोप: अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि यह आरोप अब और ज्यादा जोर पकड़ रहा है कि मेटा (इंस्टाग्राम) कुछ खास तरह के कंटेंट को बाकी सामग्री की तुलना में अधिक बढ़ावा देता है।
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जनता की राय तय करने का आरोप: उन्होंने कहा कि मेटा भारत के सार्वजनिक संवाद और विमर्श (Public Discourse) के मुद्दों पर खुद ही फैसला सुनाने और दिशा तय करने का काम कर रहा है, जो चिंताजनक है।
डेटाबीइंग्स के आंकड़ों से हुआ खुलासा
डेटाबीइंग्स की रिपोर्ट में अलग-अलग लोकेशन के प्रदर्शनों की रीच में बड़ा अंतर देखा गया:
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दिल्ली (जंतर-मंतर) प्रदर्शन: इंस्टाग्राम पर 1.8 करोड़ से अधिक यूजर्स तक पहुंच।
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रांची (झारखंड) प्रदर्शन: काफी कम रीच और विजिबिलिटी।
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की एल्गोरिदम पारदर्शिता और उनके न्यूट्रैलिटी (निष्पक्षता) को लेकर बहस तेज हो गई है।
ऑल Rights मैगज़ीन (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल

