भारत में और बढ़ेगी भीषण गर्मी

वायु प्रदूषण ने रोक रखी है भीषण गर्मी; स्वच्छ हवा की नीतियों से बढ़ेगा ‘हीट वेव’ का खतरा


एक हालिया शोध में भारत की जलवायु और बढ़ती गर्मी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फैले वायु प्रदूषण (एरोसोल्स) ने फिलहाल बढ़ती गर्मी को एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह दबा रखा है, लेकिन जैसे-जैसे स्वच्छ हवा की नीतियां लागू होंगी, देश में गर्मी का प्रकोप और अधिक घातक हो जाएगा।


प्रदूषण कैसे बन रहा है ‘शील्ड’?

वैज्ञानिकों का मानना है कि वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण (Aerosols) सूरज की किरणों को परावर्तित (Reflect) कर देते हैं, जिससे धरती की सतह तक आने वाली गर्मी कुछ कम हो जाती है।

  • विपरीत प्रभाव: यदि भारत अपनी ‘स्वच्छ हवा’ नीतियों के तहत प्रदूषण कम करने में सफल होता है, तो यह ‘शील्ड’ हट जाएगी और सूरज की तपिश सीधे तौर पर बढ़ेगी।

  • भविष्य की चुनौती: प्रदूषण मुक्त हवा स्वास्थ्य के लिए अच्छी है, लेकिन यह ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को और अधिक प्रत्यक्ष और तीव्र बना देगी।

2030 तक करोड़ों श्रमिकों पर संकट

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2030 तक भारत के करोड़ों श्रमिकों, विशेष रूप से निर्माण कार्य, कृषि और असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों को घातक हीट वेव (Heat Wave) का सामना करना पड़ेगा।

  • असहनीय स्थितियां: बढ़ता तापमान और आर्द्रता (Humidity) मिलकर ऐसी स्थितियां पैदा करेंगे जहाँ खुले में काम करना जानलेवा हो सकता है।

  • आर्थिक प्रभाव: अत्यधिक गर्मी के कारण कार्यक्षमता में गिरावट आएगी, जिससे देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

नीतिगत बदलाव की आवश्यकता

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब केवल प्रदूषण कम करने पर ही नहीं, बल्कि हीट रेजिलिएंस (Heat Resilience) यानी गर्मी से लड़ने की तैयारी पर भी ध्यान देना होगा। इसमें शहरों का ढांचा बदलना, काम के घंटों में बदलाव और व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण जैसे कदम अनिवार्य हैं।



  • गोपाल चन्द्र अग्रवाल, सीनियर एडिटर
  • (Allrights Magazin)

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