एवरेस्ट पर 6 दिन बिना ऑक्सीजन जिंदा
चमत्कार: बिना खाना-पानी और ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर 6 दिन जिंदा रहा शेरपा, परिवार मरा समझकर करने वाला था अंतिम संस्कार
(नई दिल्ली): माउंट एवरेस्ट की गगनचुंबी और जानलेवा ऊंचाइयों पर एक ऐसा हैरतअंगेज चमत्कार हुआ है, जिसने हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। 52 वर्षीय एक अनुभवी शेरपा गाइड, दावा ‘हिलेरी’, दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर बिना खाना, बिना पानी और बिना सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के पूरे 6 दिनों तक मौत को मात देकर जिंदगी की जंग जीत चुके हैं।
इस बीच, उनके जीवित बचने की कोई उम्मीद न देख उनके परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था और उनके अंतिम संस्कार तक की औपचारिकताएं शुरू कर दी थीं [cite: परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था, दावा के परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार तक की तैयारी कर ली थी।]।
सफाई अभियान की टीम के लिए देवदूत बने शेरपा
गुरुवार (04 जून 2026) की सुबह एवरेस्ट के बेस कैंप के पास तैनात एक विशेष सफाई टीम (क्लीनअप कैंपेन टीम) के लिए दावा ‘हिलेरी’ अचानक सुरक्षित और जीवित अवस्था में मिल गए [cite: गुरुवार को वह सुबह बेस कैंप के पास मिले।, सफाई टीम ने उन्हें बेस कैंप के पास पाया]। राहत की बात यह है कि रेस्क्यू किए जाने के बाद अब वे पूरी तरह से खतरे से बाहर हैं।
यह रेस्क्यू इसलिए भी अविश्वसनीय माना जा रहा है क्योंकि एवरेस्ट पर पर्वतारोहण (चढ़ाई) का आधिकारिक सीजन पूरी तरह समाप्त हो चुका था। सीजन खत्म होने के कारण पहाड़ों पर चढ़ने और उतरने के लिए इस्तेमाल होने वाली गाइड रस्सियों और सीढ़ियों को भी रास्तों से हटाया जा चुका था। ऐसे में शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान में बिना किसी सहारे के 6 दिन काटना किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है।
29 मई से लापता थे दावा ‘हिलेरी’
दावा के लापता होने और रेस्क्यू के बीच का घटनाक्रम कुछ इस प्रकार है:
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नीचे उतरते समय हुए थे लापता: दावा ‘हिलेरी’ बीते 28 मई की शाम को एक ब्रिटिश पर्वतारोही क्रिस थ्रॉल और एक पोलिश पर्वतारोही के दल को एवरेस्ट फतह कराने के बाद नीचे बेस कैंप की तरफ ला रहे थे।
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येलो बैंड के पास आखिरी लोकेशन: नीचे उतरने के क्रम में उन्हें आखिरी बार 29 मई को एवरेस्ट के खतरनाक ‘येलो बैंड’ क्षेत्र के पास देखा गया था, जिसके बाद उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया।
जब कई दिनों तक दावा का कोई सुराग नहीं मिला, तो पर्वतारोहण एजेंसियों और परिवार ने भारी बर्फबारी व ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए उन्हें मृत मान लिया था। लेकिन जब शुक्रवार (05 जून 2026) को उनके सकुशल वापस लौटने की खबर घर पहुंची, तो रोते-बिलखते परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी ऊंचाई पर बिना संसाधनों के इतने दिनों तक जीवित रहना मानव सहनशक्ति की सीमाओं से परे एक दुर्लभ घटना है।
रिपोर्ट: पीयूष कुमार प्रियदर्शी, पटना
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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