शेखपुरा नल जल योजना की घर घर जांच
बिहार: नल-जल योजना में गड़बड़ी पर शेखपुरा डीएम सख्त, 24 अफसर करेंगे घर-घर जांच
(शेखपुरा): बिहार के शेखपुरा जिले में महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना की बदहाली और इसमें सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में जिले के कई वार्डों में नल-जल की आपूर्ति ठप होने और पानी बंद रहने की मिल रही शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए जिला पदाधिकारी (डीएम) ने एक बड़ी कार्रवाई की है [cite: जिले में ‘हर घर नल का जल’ योजना की बदहाली पर जिला पदाधिकारी ने बड़ी कार्रवाई की है। गर्मी में कई वार्डों में नल से पानी बंद होने की शिकायतों के बाद DM ने 24 जिला स्तरीय अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित कर दी है।]। डीएम ने मामले की जमीनी हकीकत जानने और दोषियों पर नकेल कसने के लिए 24 जिला स्तरीय अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया है [cite: गर्मी में कई वार्डों में नल से पानी बंद होने की शिकायतों के बाद DM ने 24 जिला स्तरीय अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित कर दी है।]।
जनता दरबार की शिकायतों पर हुआ त्वरित एक्शन
इस कड़े प्रशासनिक फैसले के पीछे ग्रामीण इलाकों से लगातार आ रही शिकायतें मुख्य वजह रहीं:
-
जनता दरबार में फूटा था गुस्सा: जिले में प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को आयोजित होने वाले डीएम के जनता दरबार में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग लगातार यह शिकायत दर्ज करा रहे थे कि उनके वार्डों में नल-जल योजना पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है और पानी की आपूर्ति बंद है [cite: हर सोमवार और शुक्रवार को होने वाले जनता दरबार में ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे थे कि उनके वार्डों में नल-जल की आपूर्ति पूरी तरह ठप है।]।
-
गर्मी में बढ़ी किल्लत: वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पानी की यह समस्या और भी ज्यादा विकराल और गंभीर हो गई है। जनता की इस मूलभूत समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तत्काल प्रभाव से घर-घर जाकर जांच करने के आदेश जारी किए।
वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई प्रखंडों की कमान
जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए जिले के शीर्ष और वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग प्रखंडों और पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है:
-
अरियरी प्रखंड (चोरदरगाह पंचायत): यहाँ की जांच का जिम्मा अपर समाहर्ता (जांच) को सौंपा गया है।
-
बरबीघा प्रखंड (जगदीशपुर): इस क्षेत्र में अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जांच की कमान संभालेंगे।
-
शेखोपुर सराय (मोहब्बतपुर): यहाँ अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) स्वयं मुआयना करेंगे।
-
चेवाड़ा प्रखंड (लहना पंचायत): इस पंचायत की जिम्मेदारी जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) बेबी कुमारी को दी गई है।
इसी तरह जिले के कुल 24 आला अफसरों को अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में ऑन-ग्राउंड तैनात किया गया है ताकि जिले का कोई भी प्रभावित इलाका जांच से अछूता न रहे।
इन 2 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी पूरी जांच
डीएम द्वारा गठित विशेष टीम मुख्य रूप से दो प्रमुख पहलुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी:
-
पेयजल की नियमित आपूर्ति: अधिकारी सीधे उपभोक्ताओं के घरों पर जाकर यह जांचेंगे कि हर वार्ड में शुद्ध पेयजल नियमित रूप से पहुंच रहा है या नहीं। यदि किसी जगह पर पानी की आपूर्ति बंद है, तो उसके पीछे कोई तकनीकी खराबी है या फिर संबंधित कर्मियों की लापरवाही।
-
ऑपरेटरों के मानदेय का सत्यापन: योजना के तहत पानी की मोटरों और वाल्व को संचालित करने वाले स्थानीय ऑपरेटरों को समय पर उनकी सैलरी (मानदेय) मिली है या नहीं, इसकी भी गहन जांच होगी। प्रशासन को यह आशंका है कि कई जगहों पर महीनों से मानदेय न मिलने के कारण नाराज ऑपरेटरों ने खुद ही काम बंद कर दिया है, जिससे जनता परेशान हो रही है।
लापरवाही पर ठेकेदारों और कर्मियों पर होगी एफआईआर
जिला पदाधिकारी ने सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि पेयजल जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े इस कार्य में किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी नामित अधिकारी तुरंत फील्ड में उतरकर अपनी ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे और उसे सीधे जिला गोपनीय शाखा में सौंपेंगे।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन भी क्षेत्रों में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता उजागर होगी, वहां के दोषी तकनीकी कर्मियों, संबंधित ऑपरेटरों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीएम के इस औचक और कड़े एक्शन के बाद से ही नल-जल योजना की देखरेख करने वाले लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
रिपोर्ट: पीयूष कुमार प्रियदर्शी, पटना
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

बिहार में सभी पुलों का होगा सेफ्टी ऑडिट!
