राजकोट: 2500 करोड़ का साइबर फ्रॉड
गुजरात: 2500 करोड़ का महा-साइबर फ्रॉड; बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था ‘म्यूल अकाउंट’ का काला खेल
गुजरात के राजकोट में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसका आंकड़ा अब 2500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस मामले में पुलिस ने निजी बैंकों के तीन अधिकारियों समेत तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 21 हो गई है।
बैंक अधिकारियों की ‘धोखाधड़ी’ में भूमिका
राजकोट ग्रामीण पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नामी प्राइवेट बैंकों के अधिकारी कमीशन के लालच में साइबर ठगों की मदद कर रहे थे।
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गिरफ्तार अधिकारी: पुलिस ने मौलिक कमानी (यस बैंक, पडधरी), कल्पेश डांगरिया (एक्सिस बैंक, जामनगर) और अनुराग बलधा (एचडीएफसी बैंक) को गिरफ्तार किया है।
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कैसे करते थे मदद: ये अधिकारी आरबीआई (RBI) के नियमों को ताक पर रखकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘म्यूल अकाउंट’ (दूसरों के नाम पर खाते) खोलते थे।
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अलर्ट को दबाना: जब इन खातों में करोड़ों का लेनदेन होता और बैंक सिस्टम अलर्ट जारी करता, तो ये अधिकारी अतिरिक्त फर्जी दस्तावेज लगाकर उन खातों को एक्टिव रखते थे ताकि ठगी का पैसा आसानी से निकाला जा सके।
85 फर्जी खाते और 35 डमी कंपनियां
राजकोट ग्रामीण एसपी विजय सिंह गुर्जर ने बताया कि इस सिंडिकेट ने अब तक 85 बैंक खातों और 35 डमी फर्मों का उपयोग किया है।
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हवाला कनेक्शन: ठगी की गई राशि को इन खातों के माध्यम से निकाला जाता था और फिर हवाला चैनलों के जरिए देश से बाहर भेजा जाता था।
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पूरे भारत में जाल: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर इन खातों से जुड़ी 535 शिकायतें पहले से ही दर्ज थीं।
कैसे खुला राज?
पुलिस को शुरुआती सुराग गोंडल मार्केटिंग यार्ड में ‘मेसर्स ज्योत ट्रेडिंग कंपनी’ के नाम पर खुले एक खाते से मिला, जिसमें बिना किसी ठोस व्यापार के करीब 200 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ था। इसके बाद ‘ऑपरेशन म्यूट हंट’ के जरिए पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया।
जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस अब उन सभी बैंक खातों की जांच कर रही है जो इन अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान खोले गए थे। संदिग्ध खातों के हस्ताक्षरों को मिलान के लिए एफएसएल (FSL) भेजा जाएगा। साथ ही, पुलिस ने आरोपियों के पास से हाई-एंड फोन और डिजिटल सबूत भी बरामद किए हैं, जो इस घोटाले की गहराई को दर्शाते हैं।
- गोपाल चन्द्र अग्रवाल, सीनियर एडिटर
- (Allrights Magazin)

