स्विग्गी राइडर्स हड़ताल: बरेली प्रदर्शन

“बाइक हमारी, पेट्रोल हमारा… फिर हमारी मेहनत की कीमत कंपनी क्यों तय करे?”: पे-आउट को लेकर बरेली में फूटा स्विग्गी राइडर्स का गुस्सा, हड़ताल शुरू

विशेष प्रादेशिक एवं व्यापार ब्यूरो: बरेली (उत्तर प्रदेश)

रिपोर्ट: अमरजीत सिंह(पत्रकार)

बरेली के सील चौराहा पर रविवार को स्विग्गी राइडर्स (Swiggy Delivery Executives) का बड़ा विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। कंपनी की गिरती पे-आउट दरों और लगातार वादे करने के बावजूद सुधार न होने से नाराज दर्जनों राइडर्स ने काम बंद कर हड़ताल कर दी और कंपनी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

अपनी बुनियादी मांगों को लेकर एकजुट हुए राइडर्स ने कहा कि अब महज झूठे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, उन्हें उनकी दिन-रात की मेहनत का वाजिब हक और सही मुआवजा चाहिए।

“6 महीने से लगातार दिया जा रहा धोखा”

प्रदर्शन कर रहे डिलीवरी राइडर्स का आरोप है कि पिछले छह महीनों से कंपनी प्रबंधन द्वारा उन्हें पे-आउट बढ़ाने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं बदला।

  • पुराने वादों की अनदेखी: राइडर्स ने बताया कि इससे पहले भी वे हड़ताल पर गए थे। उस समय कंपनी ने 7 दिनों के भीतर पे-आउट की नई दरें लागू करने का वादा किया था, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

  • बढ़ती महंगाई और घटती कमाई: पेट्रोल की बढ़ती कीमतों, बाइक की EMI, समय-समय पर सर्विस और इंश्योरेंस के बाद उनके हाथ में बहुत कम रकम बचती है। धूप, बारिश और भारी ट्रैफिक में दिनभर पसीना बहाने के बावजूद परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

पेनल्टी और कैंसिल ऑर्डर का दोहरा नुकसान

राइडर्स ने डिलीवरी ऐप की नीतियों और इंसेंटिव सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

  1. कैंसिल ऑर्डर का नुकसान: राइडर्स का कहना है कि जब कोई ग्राहक ऑर्डर रद्द करता है, तो उसका आर्थिक नुकसान भी राइडर को ही उठाना पड़ता है।

  2. पारदर्शिता का अभाव: मल्टी-ऑर्डर डिलीवरी और इंसेंटिव पॉलिसी में पारदर्शिता न होने के कारण ज्यादा मेहनत करने के बाद भी उनकी कमाई लगातार कम हो रही है।

क्या हैं स्विग्गी राइडर्स की मुख्य मांगें?

  • कंपनी अपने पुराने वादे पूरे करे और पे-आउट में तत्काल सुधार करे।

  • दूरी (Distance) के हिसाब से न्यायसंगत प्रति किलोमीटर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

  • कैंसिल ऑर्डर और मल्टी-ऑर्डर नीतियों में पारदर्शिता लाई जाए।

  • इंसेंटिव स्ट्रक्चर को राइडर्स के अनुकूल और व्यावहारिक बनाया जाए।

हड़ताल पर बैठे राइडर्स ने साफ किया कि वे कंपनी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अगर उनकी मेहनत का उचित दाम नहीं मिला और एकतरफा नीतियां थोपी गईं, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

प्रादेशिक एवं व्यापार ब्यूरो: बरेली (उत्तर प्रदेश)

सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

ALL rights magazine (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)

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