आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान से नहीं बदलेंगे आदेश; याचिका खारिज

 देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि आक्रामक, खतरनाक और रेबीज से संक्रमित आवारा कुत्तों को कानून के दायरे में रहकर समाप्त किया जा सकता है। इसी मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जिसके बाद कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया।

क्या था मामला और क्यों दाखिल हुई याचिका?

दरअसल, खतरनाक आवारा कुत्तों पर कार्रवाई को लेकर पूर्व में दिए गए अदालती दिशा-निर्देशों के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक बयान सामने आया था। इस बयान पर आपत्ति जताते हुए एक पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और मान के बयान के आधार पर आदेशों में बदलाव या उन पर विचार करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आपत्ति

सोमवार को इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बड़ा झटका दिया:

  • आदेश बदलने से इनकार: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर आई आपत्ति को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी राजनेता या मुख्यमंत्री के बयान के आधार पर शीर्ष अदालत के कानूनी आदेश और दिशा-निर्देश बदले नहीं जाएंगे।

  • कानूनन कार्रवाई की अनुमति: अदालत ने अपने पुराने रुख को बरकरार रखते हुए दोहराया कि जो आवारा कुत्ते समाज के लिए खतरनाक हो चुके हैं, अत्यधिक आक्रामक हैं या रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से संक्रमित हैं, उन्हें कानून के तहत तय प्रक्रियाओं के अनुसार खत्म किया जा सकता है।

हाईकोर्ट करेंगे आदेशों के पालन की निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या के जमीनी समाधान और अदालती आदेशों को सही तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) को सौंपी है:

  • निगरानी का जिम्मा: शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि आवारा कुत्तों से जुड़े इन आदेशों, नियमों और गाइडलाइंस का पालन स्थानीय प्रशासन द्वारा ठीक से किया जा रहा है या नहीं, इसकी सीधी निगरानी संबंधित राज्यों के हाई कोर्ट करेंगे।

अदालत के इस कड़े और स्पष्ट रुख के बाद अब स्थानीय नगर निगमों और प्रशासन के पास खतरनाक व संक्रमित कुत्तों पर कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जिससे नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


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