खाने के बाद मीठा खाने का विज्ञान
खाने के बाद क्यों चाहिए होता है कुछ मीठा? पढ़ें इसके पीछे का दिलचस्प साइंस: पेट भरा होने पर भी मीठा खाने की इच्छा सिर्फ स्वाद नहीं, शरीर के विज्ञान से जुड़ी है
(नई दिल्ली – निखिल पवार): क्या आपके साथ भी कभी ऐसा होता है कि गले तक पेट भरकर खाना खाने के बाद भी अचानक मन से आवाज आती है कि “काश, थोड़ा-सा मीठा मिल जाता”? चाहे हम किसी शादी की आलीशान दावत में हों या फिर घर का रोज का साधारण खाना खा रहे हों, अंत में एक गरमा-गरम गुलाब जामुन, थोड़ी-सी ठंडी खीर या फिर चॉकलेट का एक छोटा-सा टुकड़ा मिल जाए, तो जैसे तृप्ति मिल जाती है।
अक्सर लोग इसे सिर्फ अपनी ‘जीभ का चस्का’ या एक आदत मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और गहरा शारीरिक विज्ञान (Science) काम करता है। आइए जानते हैं कि आखिर भारी-भरकम भोजन के बाद भी हमारा दिमाग और शरीर मीठे के लिए क्यों मचल उठता है।
1. ‘सेरोटोनिन’ हार्मोन और मूड का कनेक्शन
जब हम हैवी मील (भारी भोजन) लेते हैं, खासकर वह भोजन जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक होती है, तो हमारे शरीर में ‘ट्रिप्टोफैन’ नाम के एमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यह एसिड सीधे हमारे दिमाग में जाकर ‘सेरोटोनिन’ (Serotonin) नाम के न्यूरोट्रांसमीटर को एक्टिवेट करता है। सेरोटोनिन को ‘हैप्पी हार्मोन’ या ‘फील-गुड हार्मोन’ भी कहा जाता है। मीठा खाने से यह हार्मोन बहुत तेजी से रिलीज होता है, जिससे हमें तुरंत मानसिक शांति, खुशी और संतुष्टि का अहसास होता है।
2. एनर्जी बूस्ट और ब्लड शुगर का खेल
भोजन करने के बाद हमारे शरीर का पूरा फोकस उस खाने को पचाने पर लग जाता है। पाचन क्रिया (Digestion Process) शुरू होते ही शरीर की बहुत सारी ऊर्जा पेट की तरफ डाइवर्ट हो जाती है, जिससे अचानक हमें सुस्ती या नींद (Food Coma) आने लगती है।
-
तुरंत ऊर्जा की मांग: हमारा शरीर इस सुस्ती से उबरने के लिए तुरंत मिलने वाली ऊर्जा की मांग करता है।
-
सिंपल कार्ब्स का जादू: चूंकि मीठी चीजों में सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स (चीनी) होते हैं, जो बहुत जल्दी ग्लूकोज में बदलकर खून में मिल जाते हैं, इसलिए हमारा दिमाग हमें मीठा खाने का संकेत देता है ताकि शरीर को झटपट एनर्जी मिल सके।
3. ‘सेंसरी स्पेसिफिक तृप्ति’ (Sensory Specific Satiety)
यह विज्ञान का एक बहुत ही अनोखा नियम है। जब हम एक ही तरह का (नमकीन, तीखा या मसालेदार) खाना लगातार खाते हैं, तो हमारे स्वाद के हिस्से (Taste Buds) उस स्वाद से कुछ समय के लिए संतृप्त या ‘बोर’ हो जाते हैं।
-
पेट भरा, पर मन खाली: ऐसे में भले ही आपका पेट पूरी तरह भर चुका हो, लेकिन आपका दिमाग उस विशिष्ट स्वाद से थक जाता है।
-
स्वाद में बदलाव: जैसे ही आपके सामने एक बिल्कुल अलग स्वाद (जैसे मीठा) आता है, दिमाग की सुस्ती दूर हो जाती है और पेट में उस नए स्वाद के लिए ‘अतिरिक्त जगह’ अपने आप बन जाती है।
4. पाचन क्रिया को गति देना (Digestion Support)
आयुर्वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान में भी इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि भारी भोजन के बाद थोड़ा-सा मीठा (जैसे गुड़ का एक छोटा टुकड़ा) खाना पाचन के लिए मददगार हो सकता है। मीठा खाने से पेट में पाचक रस (Digestive Juices) और एसिड का स्राव तेजी से होने लगता है, जो भारी भोजन को आसानी से तोड़ने और पचाने में सहायता करता है।
सावधान: आदत अच्छी है, लेकिन अति है नुकसानदेह!
खाने के बाद मीठा खाने की यह वैज्ञानिक चाहत बिल्कुल सामान्य है, लेकिन आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि आप मीठे में क्या और कितना खा रहे हैं:
-
हेल्दी विकल्प चुनें: सफेद चीनी से बने भारी हैवी डेजर्ट्स, पेस्ट्री या आइसक्रीम की जगह गुड़ का एक छोटा टुकड़ा, थोड़ी सी किशमिश, खजूर या कोई फल खाना एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प है।
मात्रा पर नियंत्रण: मीठे का आनंद लें, लेकिन केवल स्वाद और शरीर की जरूरत के संतुलन तक, ताकि कैलोरी काउंट न बढ़े और आप स्वस्थ रहें।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

हेरा फेरी 3 से परेश रावल बाहर?!
