सपा के मंच प्रबंधन पर उठे तीखे सवाल
विपक्ष का तीखा हमला: समाजवादी पार्टी पर मंच प्रबंधन और महिला नेताओं की उपेक्षा को लेकर सियासी घमासान
विशेष रिपोर्ट:दीपक
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (SP) के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और महिला सशक्तीकरण के दावों के बीच विपक्षी दलों ने पार्टी के मंच प्रबंधन (Stage Management) और आंतरिक कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद गहरा गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव के मंच पर केवल कुछ खास करीबियों का कब्जा रहा, जबकि पार्टी की ही महिला नेताओं को मंच पर समुचित स्थान न देकर उपेक्षित छोड़ दिया गया।
‘नारी शक्ति के दावों और हकीकत में अंतर’ — विपक्ष के मुख्य आरोप
विरोधी खेमे और राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा समाजवादी पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर निम्नलिखित प्रमुख सवाल उठाए जा रहे हैं:
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मंच प्रबंधन पर हावी गुटबाजी: आरोप है कि समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों और मंचों पर केवल शीर्ष नेतृत्व के करीबी और प्रभावशाली चेहरों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं को केवल भीड़ बढ़ाने के लिए पीछे छोड़ दिया जाता है।
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दिखावे की राजनीति का आरोप: विपक्षी दलों का कहना है कि एक तरफ कैमरे के सामने सपा नेतृत्व महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करता है, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के आयोजनों में महिला कैडर को फ्रंट-लाइन में जगह नहीं दी जाती।
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‘सामंती मानसिकता’ का तंज: विरोधी नेताओं ने सपा के ‘समाजवाद’ के नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि पार्टी की सोच और निर्णय प्रक्रिया आज भी सामंती रवैये से प्रेरित है, जहां प्रोटोकॉल और निष्ठा से अधिक व्यक्तिगत प्रभाव को तरजीह दी जाती है।
सपा का रुख: ‘सहानुभूति और सम्मान पार्टी का मूल सिद्धांत’
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं और महिला सभा की राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने इन आरोपों को सत्तारूढ़ दल द्वारा प्रायोजित और भ्रामक दुष्प्रचार करार दिया है:
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सहानुभूति और सम्मान का दावा: पार्टी का कहना है कि समाजवादी पार्टी में ‘महिला सभा’ और ‘महिला पंख’ की हमेशा से मजबूत भूमिका रही है। डिंपल यादव से लेकर जिला व ब्लॉक स्तर की महिला कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन में बराबर का सम्मान और जिम्मेदारियां दी गई हैं।
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समारोह की समय-सीमा व जगह की सीमा: सपा नेताओं के अनुसार मंच पर स्थान और सुरक्षा कारणों से कभी-कभी संख्या सीमित रखनी पड़ती है, जिसे विपक्ष जबरन ‘महिला अपमान’ का राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्य विपक्षी दल पर इस प्रकार के आरोप लगाना और उस पर पलटवार होना यह दर्शाता है कि राज्य में महिला वोट बैंक को साधने के लिए राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है।
