चुनाव आयोग के SIR नोटिस पर बड़ी खबर

चुनाव आयोग का SIR अभियान: हस्तियों को नोटिस मिलने के कारण और सच्चाई

नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा देश भर में चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) यानी ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान के तहत मतदाता सूचियों (Voter Lists) को अपडेट और सत्यापित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत सटीक और पारदर्शी बनाना है।

प्रशासनिक जांच के दौरान नाम और पते के मिलान में आई तकनीकी गड़बड़ियों के कारण दक्षिण भारत की प्रमुख फिल्मी हस्तियों, खिलाड़ियों और उद्योगपतियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

किन-किन प्रमुख हस्तियों को मिले नोटिस?

चुनाव आयोग की प्रारूप मतदाता सूची (Draft Roll) के आधार पर जारी नोटिस सूची में कई चर्चित नाम शामिल हैं:

  • फिल्मी हस्तियां: महेश बाबू, नम्रता शिरोडकर, एसएस राजामौली, समंथा रुथ प्रभु, विजय देवरकोंडा, आनंद देवरकोंडा, वेंकटेश दग्गुबाती और कन्नड़ अभिनेता शिवराजकुमार।

  • खेल जगत: पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण, पूर्व भारतीय महिला क्रिकेट कप्तान मिताली राज, बैडमिंटन दिग्गज पुलेला गोपीचंद और साइना नेहवाल।

  • उद्योग व कॉरपोरेट जगत: इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी व उनका परिवार, ज़ेरोधा (Zerodha) के संस्थापक नितिन कामथ व निखिल कामथ, और अपोलो ग्रुप की उपासना कामिनेनी कोंकणी।

नोटिस जारी होने के मुख्य कारण

यह कार्रवाई किसी अपराध या धोखाधड़ी का परिणाम न होकर तकनीकी व प्रशासनिक सत्यापन की वजह से हुई है:

  1. पुराने SIR रिकॉर्ड से मैपिंग न होना: वर्ष 2002 या उससे पहले के डिजिटल डेटाबेस से कई मतदाताओं की एंट्रीज (Entries) तकनीकी रूप से मैच (‘Unmapped’) नहीं हो पाईं।

  2. नाम व स्पेलिंग में अंतर: अंग्रेजी से क्षेत्रीय भाषाओं (तेलुगु/कन्नड़/हिंदी) में डिजिटल ट्रांसलेशन के दौरान नाम या पिता/पति के नाम की वर्तनी में विसंगतियां पाई गईं।

  3. पते का मिलान न होना: वर्तमान रिहाइशी पते और पुराने निकाय डेटाबेस में भिन्नता।

प्रशासन का स्पष्टीकरण: ‘वोटर आईडी रद्द नहीं हुई’

चुनाव आयोग और हैदराबाद जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का मतलब किसी का नाम मतदाता सूची से कटना या वोटिंग अधिकार खत्म होना नहीं है

  • अधिकृत प्रतिनिधि की सुविधा: व्यस्त हस्तियों या आम नागरिकों को स्वयं उपस्थित होने के साथ-साथ किसी अधिकृत प्रतिनिधि (Authorized Representative) के जरिए जरूरी पहचान व पते के दस्तावेज जमा करने का विकल्प दिया गया है।

  • दस्तावेज सत्यापन: मतदाता फॉर्म-8 (Form-8) या आवश्यक कागजात पेश कर अपनी स्पेलिंग और मैपिंग को आसानी से दुरुस्त करा सकते हैं।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

मिजोरम यूथ कांग्रेस की बैठक: 25 हजार खाली पदों पर संग्राम!

LNIPE छात्रा मौत मामले में ग्वालियर में उग्र प्रदर्शन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: