‘साहित्य का केंद्र रहा लखनऊ’: सीएम योगी

‘लखनऊ रहा है साहित्य का पुराना केंद्र’: सीएम योगी ने अवध की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को किया नमन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी और अवध की ऐतिहासिक नगरी लखनऊ की समृद्ध साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह शहर अनादि काल से कला, संस्कृति और साहित्य का एक प्रमुख केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि लखनऊ और इसके आसपास के अवध क्षेत्र ने देश को ऐसे महान साहित्यकार, कवि और मूर्धन्य लेखक दिए हैं, जिन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं से केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के मानस को गहराई से प्रभावित और आकर्षित किया है।

अवध की साहित्यिक उर्वरा भूमि और कालजयी रचनाकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस वक्तव्य के आलोक में अवध और लखनऊ की साहित्यिक यात्रा भारतीय वांग्मय का एक स्वर्णिम अध्याय है:

  • महान रचनाकारों की भूमि: लखनऊ और अवध की माटी ने गोस्वामी तुलसीदास (जिन्होंने अवधी में ‘रामचरितमानस’ की रचना की) से लेकर आधुनिक काल के मुंशी प्रेमचंद, पंडित लल्लू लाल, यशपाल, भगवती चरण वर्मा, अमृतलाल नागर और विद्यानिवास मिश्र जैसे कालजयी साहित्यकारों को वैचारिक ऊर्जा दी है।

  • गंगा-जमुनी तहज़ीब और शायरी: लखनऊ केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि उर्दू अदब और नफासत का भी सबसे बड़ा केंद्र रहा है। मीर तक़ी ‘मीर’, मिर्ज़ा ग़ालिब, ख्वाजा हैदर अली ‘आतिश’, पंडित दयाशंकर ‘नसीम’ से लेकर आधुनिक युग में अमानत लखनवी और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे शायरों ने लखनवी अदब को वैश्विक पहचान दिलाई।

‘साहित्य ही समाज का दर्पण और प्रेरणा स्रोत’

साहित्यिक आयोजनों और पुस्तकालय संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

  1. सांस्कृतिक चेतना का संवर्धन: लखनऊ का साहित्यिक योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के सामाजिक पुनर्जागरण में वैचारिक क्रांति की अलख जगाई है।

  2. नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा: आज के युवा रचनाकारों और पाठकों को लखनऊ के इस गौरवशाली अतीत से सीख लेते हुए अपनी जड़ों से जुड़ना चाहिए और रचनात्मक लेखन के माध्यम से समाज को नई दिशा देनी चाहिए।

राज्य सरकार लखनऊ और अवध क्षेत्र की इस महान साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और प्रांतीय लेखकों व शोधकर्ताओं को मंच प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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